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राज्य में ‘महा जन आरोग्य केंद्र’ शुरू किए जाएं : डॉ. हुलगेश चलवादी

राज्य में ‘महा जन आरोग्य केंद्र’ शुरू किए जाएं : डॉ. हुलगेश चलवादी

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान: पुणे महाराष्ट्र

पुणे शहर की जनसंख्या 40 लाख से अधिक हो चुकी है, इसके बावजूद महानगरपालिका की सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाएं अत्यंत सीमित हैं। राज्य के अन्य महानगरपालिकाओं में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। आम नागरिकों के हित में ‘महाराष्ट्र जन आरोग्य योजना’ लागू कर देश के अन्य राज्यों के लिए महाराष्ट्र को एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करना चाहिए, ऐसी अपील बहुजन नेता एवं पूर्व नगरसेवक डॉ. हुलगेश चलवादी ने बुधवार (25 फरवरी) को की।

उन्होंने मांग की कि प्रत्येक 10 हजार की जनसंख्या पर एक ‘महा जन आरोग्य केंद्र’ स्थापित किया जाए तथा प्रत्येक 1 लाख की जनसंख्या पर महानगरपालिका द्वारा एक सुसज्जित अस्पताल इस योजना के अंतर्गत विकसित किया जाए।

आगामी 6 मार्च को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस राज्य का बजट प्रस्तुत करेंगे। इस बजट में ‘महा जन आरोग्य योजना’ की घोषणा की जाए, इसके लिए मुख्यमंत्री के साथ पत्राचार भी किया जाएगा, ऐसी जानकारी डॉ. चलवादी ने दी।

सामान्य नागरिकों पर बढ़ते उपचार व्यय को ध्यान में रखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के साथ महानगरपालिकाओं की स्वतंत्र स्वास्थ्य योजना की आवश्यकता है। यद्यपि स्वास्थ्य राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है, फिर भी केंद्र सरकार को सुसज्जित पालिका अस्पतालों के निर्माण हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए, ऐसा भी उन्होंने कहा।

प्रशासन के सहयोग से जनसहभागिता के माध्यम से निधि एकत्रित कर नागरिकों के सहयोग से अस्पतालों का निर्माण कर सामाजिक दायित्व का निर्वहन किया जा सकता है। इससे गरीब, वंचित एवं जरूरतमंद नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में पुणे शहर एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है।

शहर में हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं चल रही हैं, किंतु प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाने की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वर्तमान में गंभीर रोगियों का भार ससून जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों पर है, जबकि निजी अस्पतालों का उपचार खर्च आम नागरिकों की पहुंच से बाहर हो गया है। कोविड-19 महामारी के पश्चात जांच, दवाइयों एवं अस्पताल व्यय में 30 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।

गरीब, वंचित एवं मध्यमवर्गीय नागरिकों को उपचार के लिए लाखों रुपये का ऋण लेना पड़ रहा है। यदि इस स्थिति को रोकना है, तो स्थानीय स्तर पर सुसज्जित, निःशुल्क एवं किफायती स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना सरकार एवं समाज, दोनों की जिम्मेदारी है। स्वास्थ्य ही वास्तविक विकास की आधारशिला है, इसलिए ‘महा जन आरोग्य योजना’ को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना आवश्यक है, ऐसा आवाहन डॉ. चलवादी ने किया।

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