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नरवाई प्रबंधन मे करे कृषि यंत्रो का उपयोग- कलेक्टर

नरवाई प्रबंधन मे करे कृषि यंत्रो का उपयोग- कलेक्टर

नरवाई जलाने पर होगी दण्डात्मक कार्यवाही

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान मऊगंज मध्यप्रदेश 

मऊगंज. जिले में खरीफ फसलों की कटाई के उपरांत खेतों में फसल अवशेष जलाने की प्रथा को रोकने एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु कृषि विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर नरवाई प्रबंधन अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर राजेश कुमार ओगरे ने कहा कि खेतों में नरवाई जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मिट्टी के जैविक गुण नष्ट हो जाते हैं। नरवाई जलाने से मिट्टी में मौजूद मित्र कीट, सूक्ष्म जीवाणु एवं आवश्यक पोषक तत्व (जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश एवं सल्फर) जलकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ क्षमता घटती है और फसलों की लागत में वृद्धि होती है। नरवाई प्रबंधन हेतु आधुनिक कृषि यंत्रों उपयोग करे।

 

उन्होने कृषक बंधुओ से खेतों में नरवाई जलाने के बजाय कृषि यंत्रों जैसे सुपर सीडर , हैप्पी सीडर ,मल्चर , रीपर बाइंडरों, रिवर्सिबल, एम.बी. प्लाऊ एवं रोटावेटर, स्ट्रॉ रीपर तथा बेलर के उपयोग की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने पर भारतीय सुरक्षा संहिता अंतर्गत अर्थदण्ड देय होगा । छोटे भूमि मालिक जिनकी भूमि का क्षेत्र 2 एकड़ से कम है, को पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में 2 हजार 500 रूपये प्रति घटना देना होगा। इसी प्रकार जिनकी भूमि का क्षेत्र 2 एकड़ से अधिक व 5 एकड़ से कम है, उन्हें पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में 5 हजार रूपये प्रति घटना देना होगा एवं जिनकी भूमि का क्षेत्र 5 एकड़ या उससे अधिक है, उन्हें पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में 15 हजार रूपये प्रति घटना देना होगा। नरवाई जलाने पर प्राथमिकि भी दर्ज की जाएगी।

 

है।

 

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