प्रशासनमध्य प्रदेशरीवा

नहर निर्माण में बाधा उत्पन्न करने वाले व्यक्तियों के विरुध कड़ी कार्रवाई की जाए – कमिश्नर 

नहर निर्माण में बाधा उत्पन्न करने वाले व्यक्तियों के विरुध कड़ी कार्रवाई की जाए – कमिश्नर 

भू अर्जन में जुड़े रहे नए नामों का वेरिफिकेशन कराया जाए

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान रीवा मध्य प्रदेश 

  रीवा :  नहर निर्माण में बाधा उत्पन्न करने वाले लोगों के विरूद्ध नियम अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। केवल किसी व्यक्ति का भू अर्जन के बाद भुगतान न होने से नहर निर्माण का कार्य नहीं रोका जा सकता है। नहर निर्माण का कार्य रोकने से बाकी किसानों के आर्थिक समृद्धि में रुकावट उत्पन्न होती है। केवल कोर्ट के द्वारा रोक लगाने से ही कार्य रोका जा सकेगा। उक्त निर्देश रीवा संभाग कमिश्नर शीलेंद्र सिंह ने बुधवार को जल संसाधन विभाग एवं विद्युत विभाग की संभागीय समीक्षा बैठक में दिए। कमिश्नर कार्यालय में आयोजित बैठक में कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कई लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजना एवं जलाशय निर्माण के लिए भू अर्जन की कार्रवाई की गई है। भू अर्जन के दायरे में आने वाले व्यक्तियों को भुगतान राशि भी दी जा रही है। कमिश्नर ने कहा कि भू अर्जन के दौरान सर्वे कर व्यक्तियों के नाम और सामग्री की मार्किंग की जाती है लेकिन उसके बाद भी कुछ नाम यदि शेष रह जाते हैं या छूट जाते हैं और नए नाम सामने आते हैं तो ऐसे नए नामों का प्राथमिकता से वेरिफिकेशन किया जाए। साथ ही उस दौरान सर्वे करने वाले व्यक्तियों की इस गलती के लिए उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई भी की जाए। कमिश्नर ने कहा कि यदि राजस्व या जल संसाधन विभाग की गलती से कोई नाम छूट गया है तो ऐसे में संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुध कडी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कमिश्नर ने कहा कि प्रथम पब्लिकेशन के बाद नहर निर्माण का कार्य शुरू किया जा सकता है और नहर निर्माण के कार्य में रुकावट पैदा करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

 

बैठक में जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर ने बताया कि बाणसागर में पर्याप्त पानी है और सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी दिया जाएगा। 6 मीडियम टैंक, 103 माइनर, 12 बड़े तालाब में 90 प्रतिशत से ऊपर जल भराव है। ऐसे में सिंचाई के लिए और उपयोग के लिए जल की कोई कमी नहीं होगी। कमिश्नर ने बैठक में नईगढ़ी सूक्ष्म दबाव सिंचाई यूनिट एक एवं दो, महेंद्र गढ़ी सूक्ष्म दबाव सिंचाई यूनिट एक एवं दो, सीतापुर-हनुमना बैराज एवं सूक्ष्म दबाव सिंचाई योजना, रिहंद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, डोंगा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, गोंड़ वृहद सिंचाई परियोजना, डोंगा जलाशय का निर्माण कार्य, बहुती नहर परियोजना, सेमरिया माइक्रो सिंचाई परियोजना, बहुती मेन कैनाल की आरडीओ शून्य किलोमीटर से 21 किलोमीटर, मंझगवा शाखा नहर माइक्रो सिंचाई योजना, सिरमौर माइक्रो सिंचाई योजना, लोनी माइक्रो मध्यम सिंचाई परियोजना, त्यौंथर माइक्रो सिंचाई योजना आदि के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की। बताया गया कि कुछ सिंचाई परियोजनाएं प्रगतिरत हैं। कुछ वन भूमि एवं मुआवजे की राशि के कारण धीमी गति से चल रही हैं। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि जो ठेकेदार एवं संबंधित जेई नहर निर्माण कार्य धीमी गति से कर रहे हैं उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। कमिश्नर ने कहा कि अनुबंध के अनुसार बजट के अभाव में कोई भी ठेकेदार कार्य नहीं रोक सकते हैं।

 

 

विद्युत विभाग की समीक्षा करते हुए कमिश्नर ने निर्देश दिए की हर ग्राम पंचायत में एक प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली लगवाई जाए। इसके लिए गांव के सक्षम व्यक्ति का चुनाव अनिवार्य रूप से किया जाए। कमिश्नर ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह प्रधानमंत्री कुसुम घटक ए, बी और सी का व्यापक प्रचार-प्रसार करना सुनिश्चित करें और सभी जेई अपने एरिया में प्रधानमंत्री कुसुम ए, बी, सी के अंतर्गत एक-एक सोलर घटक अनिवार्य रूप से लगवाएं। इससे आने वाले समय में बिजली पर निर्भरता कम हो जाएगी। इस योजना के तहत बिना बिजली वाले क्षेत्रों में सिंचाई के लिए 7.5 एचपी तक के स्टैंड अलोन सोलर पंप लगाए जाते हैं। किसान सिंचाई के बाद बची हुई अतिरिक्त बिजली को बेचकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। विद्युत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि किसानों को 10 घंटे बिजली देने का वादा किया गया था। विभाग आने वाले दिनों में किसानों को 10 घंटे बिजली प्रदान करेगा।

 

 

कमिश्नर ने निर्देश दिए कि विद्युत विभाग के अधिकारी शहरी क्षेत्र में स्मार्ट मीटर स्थापित करने के संबंध में आम जनता में जो भ्रांतियां हैं उसको प्राथमिकता से दूर करें और बताएं कि स्मार्ट मीटर लगाने से बिलिंग कम आती है। विद्युत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगाने से सटीक एवं पारदर्शी बिलिंग आती है जो वास्तविक बिजली खपत के आधार पर रहती है। इससे मैन्युअल रीडिंग की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, साथ ही यदि बिजली बिल में कोई त्रुटि एवं लाइन लास है तो उसमें कमी आती है। साथ ही बिजली चोरी करने वाले एवं अनियमितता करने वालों की पहचान शीघ्र हो जाती है। स्मार्ट मीटर का प्रमुख लाभ यह भी है कि उपभोक्ताओं को खपत की जानकारी उनके मोबाइल एप या पोर्टल पर दी जाती है। उनके बिजली खपत की दैनिक एवं मासिक उपयोग की निगरानी बेहतर तरीके से होती है। सेवा प्रबंधन अधिक तेज एवं आसान होता है साथ ही अन्य घटनाओं की तत्काल अलर्ट एवं मॉनिटरिंग संभव हो पाती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। इससे उपभोक्ता अपनी बिजली की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं। लोड प्रबंधन एवं ग्रीड की विश्वसनीयता में सुधार होता है। स्मार्ट मीटर डिजिटल एवं स्मार्ट पावर सिस्टम के आधार को मजबूत करता है। कमिश्नर ने आरडीएसएस योजना अंतर्गत नए सब स्टेशन की स्थापना एवं 33/11 केव्ही लाइन तथा खराब एवं जले ट्रांसफार्मर को प्राथमिकता से बदलने के निर्देश दिए और कहा कि जो पात्र स्थान है वहां खराब एवं जले हुए ट्रांसफार्मर तत्काल बदलकर नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएं। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि आरडीएसएस योजना अंतर्गत सभी कार्य 15 दिसंबर तक पूरा कर लिए जाएं। कमिश्नर ने कहा कि इस कार्य में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार एवं सुपरविजन करने वाले अधिकारियों पर प्रभावशील कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बैठक में संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र पटेल एवं जल संसाधन विभाग तथा विद्युत विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button