नरवाई जलाने वालों के विरुद्ध करें सख्त कार्रवाई – कलेक्टर
नरवाई जलाने पर ढाई हजार से लेकर 15 हजार रुपये तक का लगेगा अर्थदंड
हार्वेस्टर के साथ स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम अनिवार्य, उल्लंघन पर होगी वैधानिक कार्रवाई
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान रीवा मध्य प्रदेश
रीवा . खेतों में नरवाई जलाकर पर्यावरण प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा है कि जिले की संपूर्ण सीमा में फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लगा है। आदेश का उल्लंघन करने वाले किसानों पर भूमि के रकबे के अनुसार 2,500 रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति अर्थदंड लगाया जाएगा। आदेश के अनुसार दो एकड़ से कम भूमि वाले किसानों पर प्रति घटना 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ से कम भूमि पर 5 हजार रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसानों पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा। प्रत्येक कंबाइन हार्वेस्टर के साथ भूसा तैयार करने के लिए स्ट्रारीपर रखना अथवा हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। बिना व्यवस्था के हार्वेस्टर चलाने पर मालिक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर श्री नरेंद्र सूर्यवंशी ने किसानों को नरवाई प्रबंधन के प्रति जागरूक करने तथा सुपर सीडर, हैप्पी सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। नरवाई जलाने की घटनाओं पर विकासखंड एवं ग्राम पंचायत स्तरीय निगरानी समितियां नजर रखेंगी। कृषि अभियांत्रिकी विभाग सेटेलाइट के माध्यम से घटनाओं की जानकारी प्रशासन को उपलब्ध कराएगा। उल्लंघन की स्थिति में समिति के सदस्य संयुक्त जांच कर प्रतिवेदन तहसीलदार को देंगे। इसके बाद एसडीएम नियमानुसार अर्थदंड अधिरोपित करेंगे। आदेश का उल्लंघन करने पर पुलिस प्राथमिकी और भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकेगी।
कलेक्टर ने कृषि अभियांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए कि किसानों को नरवाई के उचित प्रबंधन के लिए सुपर सीडर, हैप्पी सीडर सहित अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन सुनिश्चित करने और नरवाई जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें। उप संचालक क़ृषि रीवा ने कहा कि फसल कटाई के बाद खेतों में बचे डंठलों और फसल अवशेषों को जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। आग से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है, जबकि उड़ती चिंगारियों से आसपास के खेतों, खलिहानों और अन्य स्थानों पर आग लगने का खतरा बना रहता है। इससे जन-धन, पशु-पक्षियों और खेतों में रखी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरक शक्ति भी प्रभावित होती है।

