
बौद्ध गया मंदिर अधिनियम 1949 को निरस्त कर बौद्ध गया स्थित महाबोधि विहार को मनुवादी पंडितों के कब्जे से मुक्त कराया जाए -डॉ.हुलगेश चलवादी ने बहुजन समाज पार्टी की ओर से संभागीय आयुक्त को निवेदन दिया
पुणे : बौद्ध गया में महाबोधि बुद्ध विहार कई वर्षों से मानवतावादी पंडितों के कब्जे में है और उस स्थान पर अनुष्ठान करके बुद्ध की मूर्तियों और विहार को अपवित्र किया जा रहा है। कई वर्षों से बौद्ध लोग लोकतांत्रिक तरीकों से आंदोलन करके अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं और बहुजन समाज पार्टी की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि सरकार और प्रशासन हमारे लोकतांत्रिक देशों में उनके आंदोलन को कुचलने की कोशिश कर रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश महासचिव व मुख्य झोन प्रभारी डॉ हुलगेश चलवादी ने संभागीय आयुक्त को एक निवेदन दिया है । उनके साथ पुणे जिला अध्यक्ष अशोक गायकवाड़, पुणे जिला प्रभारी महेश जगताप, मोहम्मद शफी, अनिल त्रिपाठी, पुणे जिला महासचिव प्रवीण वाकोड़े और अन्य पदाधिकारी मौजूद थे. चलवादी ने अपने बयान में कहा है कि भगवान बुद्ध का धम्म दुनिया में राजसी धर्म बन गया है लेकिन हमारे देश में बौद्धों के मामले में सरकार की मानसिकता उन्हें न्याय देने की नहीं है, विहार की वास्तविकता को देखते हुए 1949 के बोधि गया अधिनियम को निरस्त किया जाना चाहिए और महाबोधि विहार को नासमझ पंडित के नियंत्रण से मुक्त किया जाना चाहिए। ऐसा ज्ञापन बहुजन समाज पार्टी की ओर से संभागीय आयुक्त पुणे को दिया गया है.