
‘विकसित भारत’ के लिए नवाचार और शोध जरूरी: राज्यपाल जिष्णू देव वर्मा
एआईयू की 100वीं वार्षिक महासभा का पुणे में उद्घाटन, उच्च शिक्षा में नवोपक्रम और कौशल विकास पर जोर
रिपोर्ट : विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे, । महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णू देव वर्मा ने कहा कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नवाचार, अनुसंधान और समावेशी शिक्षा व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
पिंपरी स्थित डॉ. डी. वाय. पाटील विश्वविद्यालय में असोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) की 100वीं वार्षिक महासभा तथा “ज्ञान और नवाचार से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कुलपति सम्मेलन का उद्घाटन राज्यपाल के हाथों संपन्न हुआ।
राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना समय की मांग है। विश्वविद्यालयों को केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले युवाओं को तैयार करना चाहिए। उन्होंने कौशल विकास को प्राथमिकता देते हुए समावेशी शिक्षा प्रणाली विकसित करने का आह्वान किया।
उन्होंने उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी बल दिया। साथ ही पर्यावरण अनुकूल विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत तकनीकों को शिक्षा में शामिल करने की जरूरत बताई।
एआईयू की शताब्दी परंपरा का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह संगठन देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र को दिशा देने वाली महत्वपूर्ण संस्था है। उन्होंने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. जाकिर हुसैन और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान शिक्षाविदों की विरासत को प्रेरणादायी बताया।
एआईयू के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक ने कहा कि भारत ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसकी नींव विश्वविद्यालयों में रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि शोध, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देकर ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में विश्वविद्यालयों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. डी. पाटील ने स्वागत भाषण में कहा कि शिक्षा का अंतिम उद्देश्य समाज सेवा है और संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ जिम्मेदार नागरिक तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
एआईयू की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल ने संगठन की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षा को अधिक समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए विभिन्न पहल की जा रही हैं।
इस अवसर पर “ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ एजुकेशन”, एआईयू की 100 वर्ष की स्मारिका तथा “इंडियन यूनिवर्सिटी जर्नल” का भी राज्यपाल के हाथों विमोचन किया गया।


