
नया सोलर नीति राज्य के उद्योगों के लिए घातक
राष्ट्रवादी उद्योग आघाड़ी का आरोप; उद्योगों के राज्य से बाहर पलायन की आशंका
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे,: राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नई सोलर नीति उद्योगों के लिए गंभीर रूप से नुकसानदायक साबित हो रही है। इस नीति में शामिल ग्रिड सपोर्ट चार्ज, बदली हुई नेट मीटरिंग व्यवस्था, अत्यधिक बिजली शुल्क और बैटरी (हाइब्रिड) प्रणाली की अनिवार्यता के कारण उद्योगों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। 1 अप्रैल से लागू इस नीति के चलते कई प्रोजेक्ट दिवालियापन की कगार पर पहुंच गए हैं। इसके परिणामस्वरूप महाराष्ट्र के उद्योग अन्य राज्यों में स्थानांतरित होने की स्थिति में हैं, ऐसा आरोप राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की उद्योग आघाड़ी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाया।
उद्योग आघाड़ी के प्रदेश महासचिव मनीष कोंडे और पश्चिम महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष सागर शिनगारे ने कहा कि यह सोलर नीति राज्य के औद्योगिक विकास के लिए घातक साबित हो रही है।
मनीष कोंडे ने कहा, “नई सोलर नीति के कारण उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। ग्रिड सपोर्ट चार्ज, नेट मीटरिंग में बदलाव और अतिरिक्त बिजली शुल्क के खिलाफ उद्यमियों में तीव्र असंतोष है। राज्य के हजारों उद्योग, सोलर ईपीसी कंपनियां और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए हैं। बैंकिंग पर लगाए गए प्रतिबंध और बैटरी (हाइब्रिड) सिस्टम की अनिवार्यता के कारण सोलर प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता काफी कम हो गई है। इसके अलावा, स्वयं उत्पादित सोलर बिजली पर भी बिजली शुल्क लगाए जाने से उद्योगों में नाराजगी बढ़ी है।”
उन्होंने आगे बताया कि “पहले हर महीने एक लाख यूनिट सोलर बिजली उत्पादन करने वाले उद्योग को लगभग 10 लाख रुपये की बचत होती थी, लेकिन नई नीति के बाद यह बचत घटकर केवल 2 लाख रुपये रह गई है। यानी हर महीने करीब 7 से 8 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ औद्योगिक क्षेत्र में करीब 800 से 1500 उद्योग प्रभावित हुए हैं, जबकि पूरे महाराष्ट्र में 5000 से 10000 उद्योग इस नीति से प्रभावित हैं। इससे राज्य के उद्योगों को हर साल लगभग 5000 से 9000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। साथ ही, सोलर सेक्टर में हजारों नौकरियां भी खतरे में हैं।”
सागर शिनगारे ने कहा, “सबसे चिंता की बात यह है कि उद्योग खुद सोलर से बिजली उत्पादन करने के बावजूद उन पर ग्रिड सपोर्ट चार्ज लगाया जा रहा है। दिन में उत्पादित बिजली का रात में उपयोग नहीं हो पाने से ऊर्जा की भारी बर्बादी हो रही है, जिससे सोलर प्रोजेक्ट का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में सोलर नीति अधिक उद्योग-अनुकूल है और वहां निवेश को प्रोत्साहन मिल रहा है। अगर महाराष्ट्र में इस नीति में तुरंत बदलाव नहीं किया गया, तो उद्योगों का अन्य राज्यों में पलायन होना तय है।”
उद्यमियों की प्रमुख मांगें:
ग्रिड सपोर्ट चार्ज तत्काल समाप्त किए जाएं
नेट मीटरिंग प्रणाली को पहले की तरह बहाल किया जाए
रात के समय सोलर बिजली उपयोग की अनुमति दी जाए
स्वयं उत्पादित सोलर बिजली पर बिजली शुल्क न लगाया जाए
बैटरी (हाइब्रिड) प्रणाली को वैकल्पिक बनाया जाए
सोलर नीति को उद्योग-अनुकूल और स्थिर बनाया जाए


