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मराठी न जानने वाले रिक्शा-टैक्सी चालकों के लाइसेंस रद्द न किए जाएं

मराठी न जानने वाले रिक्शा-टैक्सी चालकों के लाइसेंस रद्द न किए जाएं

प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हुलगेश चलवादी ने स्पष्ट की पार्टी की भूमिका

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: पुणे महाराष्ट्र 

, पुणे:  राज्य सरकार द्वारा लाइसेंसधारी रिक्शा एवं टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने का निर्णय महाराष्ट्र की अस्मिता को सुदृढ़ करने वाला तथा मराठी भाषा के सम्मान हेतु उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे लोगों को मराठी अवश्य सिखाई जानी चाहिए, लेकिन उनके लाइसेंस रद्द करना उचित नहीं है। यह बात रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. हुलगेश चलवादी ने मंगलवार (28 अप्रैल) को पार्टी की भूमिका स्पष्ट करते हुए कही।

डॉ. चलवादी ने कहा कि महाराष्ट्र में व्यवसाय करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए मराठी भाषा पढ़ना, लिखना और बोलना आवश्यक है। महाराष्ट्र संतों, समाज सुधारकों और समृद्ध मराठी संस्कृति की भूमि है, इसलिए यहां रहने और आजीविका चलाने वाले नागरिकों को स्थानीय भाषा का सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार द्वारा 1 मई से मराठी भाषा न जानने वाले रिक्शा-टैक्सी चालकों के लाइसेंस सीधे रद्द करने का निर्णय उचित नहीं है।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक द्वारा दी गई चेतावनी तथा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा व्यक्त स्पष्ट रुख राज्य की भाषाई नीति की दिशा को दर्शाता है। साथ ही, भाजपा द्वारा मराठी सिखाने के लिए प्रशिक्षण वर्ग शुरू करना सराहनीय पहल है। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) भी रिक्शा-टैक्सी चालकों को मराठी सिखाने के लिए प्रयास करेगी।

डॉ. चलवादी ने कहा कि अन्य राज्यों में जाकर व्यवसाय करने पर वहां की भाषा सीखना आवश्यक होता है, उसी प्रकार महाराष्ट्र में भी मराठी भाषा का सम्मान बनाए रखना चाहिए। यह नियम केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित न रहकर सभी क्षेत्रों में लागू होना चाहिए।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया में व्यवसायिक लाइसेंस रद्द करने जैसी शर्तें कठोर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 80 प्रतिशत बाहरी लोगों को मराठी आती है, और जिन्हें नहीं आती, उन्हें इसे सीखना चाहिए।

डॉ. चलवादी ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले की भी यही स्पष्ट भूमिका है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के इस निर्णय का रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) आंशिक समर्थन करती है और यह मराठी भाषा के गौरव को बढ़ाने में प्रभावी साबित होगा।

विशेष उल्लेखनीय है कि मूल रूप से कर्नाटक के निवासी होने के बावजूद डॉ. हुलगेश चलवादी की मराठी भाषा पर अच्छी पकड़ की स्वयं रामदास आठवले ने भी सराहना की है।

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