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ऑपरेशन नया सवेरा 3.0′ : सीतामढ़ी पुलिस की प्रभावी कार्रवाई, 20 बच्चों को बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी एवं बाल तस्करी से कराया गया मुक्त

ऑपरेशन नया सवेरा 3.0′ : सीतामढ़ी पुलिस की प्रभावी कार्रवाई, 20 बच्चों को बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी एवं बाल तस्करी से कराया गया मुक्त

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान: सीतामढ़ी बिहार 

सीतामढ़ी: बिहार पुलिस मुख्यालय के निर्देशन में सीतामढ़ी जिला पुलिस द्वारा बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी एवं बाल तस्करी के विरुद्ध संचालित विशेष अभियान “ऑपरेशन नया सवेरा 3.0” के अंतर्गत उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। यह अभियान सीतामढ़ी पुलिस की मानव तस्करी निरोध इकाई के द्वारा एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन , अदिथी संस्था तथा श्रम विभाग के संयुक्त सहयोग से वरीय पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) सह नोडल पदाधिकारी, मो० नजीब अनवर के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संचालित किया गया। अभियान के तहत दिनांक 01 जुलाई 2026 से 14 जुलाई 2026 के बीच कुल 20 बच्चों को बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी एवं बाल तस्करी जैसी गंभीर परिस्थितियों से मुक्त कराया गया। यह कार्रवाई पुलिस निरीक्षक सह शाखा प्रभारी, मानव तस्करी निरोध इकाई (AHTU) सुशील कुमार सिंह के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस अवधि में सुरसंड, मेजरगंज, रीगा, रुन्नीसैदपुर एवं सोनबरसा थाना क्षेत्रों में प्रभावी छापेमारी एवं विधिसम्मत कार्रवाई की गई। अभियान की सफलता में संबंधित सभी थाना प्रभारियों एवं पुलिस बल की सक्रिय भागीदारी और समन्वित कार्यशैली अत्यंत सराहनीय रही। सीतामढ़ी पुलिस का यह अभियान स्पष्ट संदेश देता है कि जिले में बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी एवं बाल तस्करी जैसे अपराधों के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई गई है। बच्चों के अधिकारों की रक्षा तथा सुरक्षित बचपन सुनिश्चित करने के लिए जिला पुलिस निरंतर प्रतिबद्ध है। इस अभियान की सफलता में सुरसंड थाना, मेजरगंज थाना, रीगा थाना, रुन्नीसैदपुर थाना एवं सोनबरसा थाना की भूमिका विशेष रूप से प्रशंसनीय रही। साथ ही एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन, अदिथी संस्था एवं श्रम विभाग के समन्वित सहयोग ने अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया।सीतामढ़ी पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई बच्चा बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी अथवा मानव तस्करी का शिकार होता दिखाई दे, तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस अथवा संबंधित विभाग को दें। समाज और प्रशासन की साझी भागीदारी से ही प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं अधिकारपूर्ण बचपन उपलब्ध कराया जा सकता है।

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