धान उपार्जन के लिए पंजीयन 15 सितम्बर से 10 अक्टूबर तक
फार्मर रजिस्ट्री कराने पर ही मिलेगा समर्थन मूल्य में उपार्जन का मौका – कलेक्टर
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान रीवा मध्य प्रदेश
रीवा : किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य देने के लिए शासन द्वारा किसानों से निर्धारित समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन किया जाएगा। उपार्जन के लिए किसानों का ऑनलाइन पंजीयन होना आवश्यक है। ऑनलाइन पंजीयन 15 सितम्बर से 10 अक्टूबर तक किया जायेगा। इस संबंध में कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने बताया कि किसान ग्राम पंचायत कार्यालय के सुविधा केन्द्र, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय, सहकारी समितियों एवं खरीदी केन्द्रों में नि:शुल्क पंजीयन करा सकते हैं। एमपी किसान एप अपने एन्ड्रायड मोबाइल पर डाउनलोड करके किसान स्वयं पंजीयन कर सकते हैं। इसके अलावा किसान एमपी ऑनलाइन कियोस्क सेंटर, कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केन्द्र एवं निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे में 50 रुपए का शुल्क तथा आवश्यक दस्तावेज देकर 10 अक्टूबर तक उपार्जन के लिए पंजीयन करा सकते हैं।
कलेक्टर ने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान के उपार्जन का लाभ लेने के लिए किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य है। फार्मर रजिस्ट्री कराने पर ही धान उपार्जन के लिए किसानों का पंजीयन होगा। सभी पंजीयन केन्द्रों में भी फार्मर रजिस्ट्री बनाने की सुविधा दी जाएगी। कलेक्टर ने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तथा पटवारी से संपर्क करके सभी किसान फार्मर रजिस्ट्री अवश्य बनवा लें। उपार्जन सहित शासन की अन्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी फार्मर रजिस्ट्री होना आवश्यक है।
कलेक्टर ने बताया कि धान के उपार्जन का पंजीयन कराने के लिए किसानों को अपने आधार कार्ड, बोये गए अनाज के रकबे की जानकारी के लिए ऋण पुस्तिका की प्रति, आधार सीडेड बैंक खाते तथा बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नम्बर की जानकारी देना आवश्यक होगा। बैंक खाते के साथ-साथ बैंक का आईएफएस कोड भी किसान अवश्य प्रस्तुत करें। उपार्जन से भुगतान के लिए जनधन खाते, अक्रिय बैंक खाते, संयुक्त बैंक खाते एवं फिनो, एयरटेल, पेटीएम बैंक खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे। उपार्जन का भुगतान आधार संख्या तथा फोन नम्बर से जुड़े बैंक खाते से किया जाएगा। किसानों का पंजीयन गिरदावरी के आधार पर किया जाएगा। पूर्व से पंजीकृत किसानों एवं नवीन किसानों की भूमि का रकबा, फसल एवं फसल की किस्म की जानकारी गिरदावरी से ली जायेगी। पंजीयन ओटीपी आधारित व्यवस्था से होगा। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए 15 सितम्बर तक सक्षम प्राधिकारी से हस्ताक्षरित सिकमी/बटाईदार अनुबंध ही पंजीयन के लिए मान्य होंगे।
