परीक्षा प्रक्रिया में स्थिरता, सुरक्षा और पारदर्शिता को प्राथमिकता
निश्चित समय-सारणी, प्रश्नपत्र सुरक्षा, केंद्रीकृत शिकायत निवारण और परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं पर जोर
विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और हितधारकों से सुझाव; राज्यभर से 18 हजार से अधिक ई-मेल प्राप्त
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, । महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, स्थिर और अभ्यर्थी-केंद्रित बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय भर्ती परीक्षा टास्क फोर्स की ओर से पुणे में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान परीक्षा की समय-सारणी, प्रश्नपत्र की गुणवत्ता, प्रश्नपत्र लीक रोकने, पदों की संख्या, उत्तरतालिका, परीक्षा केंद्रों, शिकायत निवारण तथा ‘ऑप्टिंग आउट’ सहित विभिन्न विषयों पर सुझाव प्राप्त किए गए।
सामान्य प्रशासन विभाग की अपर मुख्य सचिव (सेवा) तथा टास्क फोर्स की अध्यक्ष वी. राधा की अध्यक्षता में यह समिति कार्यरत है। समिति में पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग के सचिव वीरेंद्र सिंह, पशुसंवर्धन एवं डेयरी विकास तथा मत्स्य व्यवसाय विभाग के सचिव डॉ. एन. रामास्वामी, नासिक संभागीय आयुक्त प्रवीण गेडाम, संघ लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य एयर मार्शल अजीत शंकरराव भोसले (सेवानिवृत्त) तथा आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर श्यामप्रसाद करगड्डे शामिल हैं।
टास्क फोर्स को अब तक राज्यभर से 18 हजार से अधिक ई-मेल प्राप्त हुए हैं। विद्यार्थियों ने मांग की कि प्रतियोगी परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर पहले से निश्चित कर उसका पालन किया जाए तथा परीक्षा प्रक्रिया में बार-बार बदलाव न करते हुए दीर्घकालीन स्थिरता प्रदान की जाए। विभिन्न संवर्गों के लिए न्यूनतम पदों की संख्या पहले ही घोषित करने का सुझाव भी दिया गया।
प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसकी छपाई, परिवहन और वितरण तक की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है। ऐसी ई-प्रश्न बैंक प्रणाली विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है, जिसमें प्रश्न तैयार करने वाले व्यक्ति को भी यह जानकारी न हो कि प्रश्न किस परीक्षा के लिए तैयार किया जा रहा है। समिति ने ‘जीरो लीक’ को परीक्षा प्रक्रिया का प्रमुख लक्ष्य बताया।
प्रश्नपत्र में त्रुटियों और उत्तरतालिका में गलतियों को रोकने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाने का सुझाव दिया गया। साथ ही उत्तरपत्रिकाओं की जांच के लिए समान मानदंड तय करने और परीक्षकों की गुणवत्ता की जांच करने की मांग भी विद्यार्थियों ने रखी।
अभ्यर्थियों की शिकायतों और आपत्तियों के लिए केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने का सुझाव दिया गया। परीक्षा केंद्रों पर स्वच्छतागृह, पेयजल और उचित बैठक व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। सभी परीक्षाओं के लिए एक ही बार पंजीकरण और शुल्क भुगतान की व्यवस्था करने का सुझाव भी सामने आया।
एक ही अभ्यर्थी के एक से अधिक पदों के लिए पात्र होने की स्थिति में पद चयन और ‘ऑप्टिंग आउट’ की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की गई। दिव्यांग और खेल वर्ग के प्रमाणपत्रों की उचित चरण पर जांच करने का सुझाव भी दिया गया।
इस बीच, अगले एक वर्ष तक ऑनलाइन परीक्षा नहीं कराकर केवल ओएमआर पद्धति से परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है, यह जानकारी वी. राधा ने दी। इस अवधि के बाद ओएमआर पद्धति से परीक्षा आयोजित करने के संबंध में सरकार के स्तर पर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि ओएमआर आधारित परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और एक समान तरीके से आयोजित करने के लिए मानक नियमावली तैयार करने का काम फिलहाल जारी है।
देश के विभिन्न लोकसेवा आयोगों की कार्यप्रणाली का भी अध्ययन किया जा रहा है। तमिलनाडु, गुजरात और संघ लोकसेवा आयोग की कार्यप्रणाली का तुलनात्मक अध्ययन कर महाराष्ट्र के लिए उपयोगी सुधार लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। विद्यार्थियों सहित सभी हितधारकों से प्राप्त सुझावों पर गंभीरता से विचार कर परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बनाया जाएगा, ऐसा राधा ने कहा।
एमपीएससी पर बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए आयोग के मानव संसाधन, तकनीकी क्षमता और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता भी व्यक्त की गई। अधिक गतिशील, पारदर्शी और जवाबदेह अधिकारी चयन प्रक्रिया तैयार करना टास्क फोर्स का उद्देश्य है, ऐसा पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते ने कहा।
इस अवसर पर संभागीय आयुक्त शीतल तेली-उगले, जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी, अपर जिलाधिकारी सतीश राऊत, निवासी उपजिलाधिकारी ज्योति कदम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

