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सैंया भए कोतवाल, अब हमें डर काहे का?

सैंया भए कोतवाल, अब हमें डर काहे का?

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान इटावा उत्तर प्रदेश 

इटावा। बिजली उपभोक्ताओं के बिलों में छोटी-छोटी बढ़ोतरी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। उदाहरण के तौर पर एक उपभोक्ता के कनेक्शन पर एक माह में ₹159 का भुगतान दर्ज है, जबकि अगले बिल में राशि ₹164.25 दिखाई गई है। यानी दोनों बिलों के बीच ₹5.25 का अंतर है।

 

यह केवल एक उपभोक्ता का मामला है या बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के बिलों में इसी तरह का अंतर सामने आ रहा है, इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। सवाल यह भी है कि बिल की राशि में यह अंतर किन कारणों से आया और उपभोक्ता को इसकी स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जाती?

 

विशाल समाचार समय-समय पर बिजली बिल, मीटर रीडिंग और उपभोक्ताओं की शिकायतों से जुड़े मामलों को प्रमुखता से प्रकाशित करता रहा है। बिजली व्यवस्था और बिलिंग व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर संबंधित विभाग के समक्ष शिकायतें भी रखी जाती हैं। इसके बावजूद यदि वही सवाल बार-बार सामने आ रहे हैं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इटावा शहर और ग्रामीण क्षेत्र में कुल कितने बिजली उपभोक्ता हैं? यदि बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के बिल में औसतन ₹5–6 का अंतर सामने आता है, तो इसका कुल आर्थिक प्रभाव कितना होगा?

 

हालांकि किसी भी राशि को गलत वसूली या वित्तीय अनियमितता कहना जांच के बिना उचित नहीं होगा। इसलिए UPPCL और संबंधित अधिकारियों से मांग है कि शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के कुल उपभोक्ताओं की संख्या, बिलिंग प्रक्रिया तथा बिलों में राशि के अंतर से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं और उपभोक्ताओं की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

खबर प्रकाशित होती है, शिकायतें भी होती हैं, सवाल भी उठते हैं—फिर भी सुधार कब होगा?

उपभोक्ताओं को सही बिल, स्पष्ट जानकारी और पारदर्शी बिजली बिलिंग व्यवस्था मिलना जरूरी है।

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