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मुळशी की माले ग्राम पंचायत के कामकाज पर गंभीर आरोप, जिलाधिकारी से जांच की मांग

मुळशी की माले ग्राम पंचायत के कामकाज पर गंभीर आरोप, जिलाधिकारी से जांच की मांग

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान माले मुळशी पुणे 

माले, मुळशी। मुळशी तहसील की माले ग्राम पंचायत के कामकाज को लेकर गंभीर आरोप सामने आने से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सरपंच और ग्रामसेवक के कथित मिलीभगत से फर्जी ग्रामसभा आयोजित दिखाने, ग्रामीणों के नाम पर कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर करने तथा सरकारी रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही ग्राम पंचायत के कामकाज में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितता और गबन की चर्चा भी सामने आई है।

 

इन आरोपों के बाद माले ग्राम पंचायत के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य सवाल यह है कि क्या ग्रामसभाएं वास्तव में आयोजित हुई थीं या उन्हें केवल कागजों पर दिखाया गया? ग्रामसभा की कार्यवाही में दर्ज ग्रामीणों के हस्ताक्षर वास्तविक हैं या नहीं? इन कथित दस्तावेजों के आधार पर कौन-कौन से प्रस्ताव मंजूर किए गए और उनके आधार पर क्या निर्णय लिए गए, इसकी जांच की मांग की जा रही है।

 

आरोपों में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि ग्रामसभा की कार्यवाही और वास्तविक स्थिति में अंतर है, तो क्या इससे सरकारी तंत्र को गुमराह किया गया और क्या सार्वजनिक धन के लेन-देन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई।

 

माले एक बड़ी ग्राम पंचायत होने के कारण मामला केवल गांव तक सीमित नहीं रह गया है। कथित फर्जी ग्रामसभा, हस्ताक्षरों के कथित दुरुपयोग और करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर अब पूरे मुळशी क्षेत्र में चर्चा है।

 

जांच से सामने आएगी वास्तविकता

 

सरपंच और ग्रामसेवक की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड, ग्रामसभा की कार्यवाही, हस्ताक्षर, प्रस्ताव और वित्तीय लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

एडवोकेट राजेश सातपुते और ग्राम सदस्य चेतन आधवडे की ओर से मामले की जांच के लिए आवेदन किया गया है। अब जिलाधिकारी स्तर से होने वाली जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है।

 

फिलहाल पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। जांच के निष्कर्ष पर ही यह तय होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी है।

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