
महाराष्ट्र लोकसेवा अधिकार कानून को अधिक सक्षम बनाएं; नागरिक सोशल फाउंडेशन की राज्य सरकार से मांग
विलंब के लिए प्रतिदिन 250 रुपये जुर्माना, 21 दिनों में सेवा देने की समयसीमा और नागरिकों को तत्काल मुआवजा देने का प्रस्ताव
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे : महाराष्ट्र लोकसेवा अधिकार अधिनियम, 2015 को अधिक सक्षम, प्रभावी और नागरिक केंद्रित बनाने की मांग नागरिक सोशल फाउंडेशन की ओर से की गई है। सरकारी सेवाएं समय पर नहीं मिलने, ‘आपले सरकार’ पोर्टल पर तकनीकी समस्याओं, लंबित आवेदनों और अधिकारियों पर सीमित कार्रवाई के कारण नागरिकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी पृष्ठभूमि में कानून में आवश्यक संशोधन के लिए विभिन्न मांगें और सुझाव महाराष्ट्र तथा केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत किए गए हैं। यह जानकारी नागरिक सोशल फाउंडेशन के एडवोकेट सीए निलेश खत्री ने पत्रकार वार्ता में दी।
इस अवसर पर नागरिक सोशल फाउंडेशन के ट्रस्टी अमेय सप्रे, प्रीतम थोरवे, सर्वेश मेहेंदळे सहित अन्य उपस्थित रहे।
महाराष्ट्र लोकसेवा अधिकार अधिनियम के तहत नागरिकों को निर्धारित समयसीमा में सरकारी सेवाएं प्राप्त करने का कानूनी अधिकार है। हालांकि, कानून लागू हुए करीब 11 वर्ष हो चुके हैं, इसके बावजूद इसके क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। वर्तमान में संबंधित अधिकारियों पर अधिकतम 5,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। संस्था का कहना है कि इस जुर्माने का पर्याप्त निवारक प्रभाव नहीं है। इसलिए जुर्माने की राशि को अधिकारियों के वेतन से जोड़ने की सिफारिश की गई है।
निर्धारित समयसीमा में सेवा उपलब्ध नहीं होने पर देरी के प्रत्येक दिन के लिए 250 रुपये का स्वतः जुर्माना लगाया जाए। साथ ही जुर्माने की राशि पहले संबंधित नागरिक को मुआवजे के रूप में दी जाए और बाद में दोषी अधिकारी से वसूल की जाए। अपील प्राधिकरण द्वारा समय पर निर्णय नहीं लेने की स्थिति में उन्हें भी जिम्मेदार ठहराकर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान करने की मांग की गई है।
‘आपले सरकार’ पोर्टल पर कुल 1,165 सेवाओं में से कई सेवाएं अभी तक उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा भी संस्था ने उठाया है। सभी अधिसूचित सरकारी सेवाओं को एक ही पोर्टल पर उपलब्ध कराने के साथ ‘सिंगल साइन-ऑन’ सुविधा लागू करने की मांग की गई है। एक ही लॉगिन के माध्यम से विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध होने से नागरिकों का समय बचेगा और अलग-अलग पोर्टल की तकनीकी समस्याओं से होने वाली परेशानी कम होगी।
पोर्टल में तकनीकी खराबी के कारण विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रक्रिया प्रभावित होने के उदाहरण भी सामने आए हैं। दसवीं की परीक्षा में खेल क्षेत्र में प्रदर्शन के लिए मिलने वाले अतिरिक्त अंकों की प्रक्रिया में तकनीकी समस्याओं के कारण करीब 3,600 विद्यार्थियों को नुकसान होने का संदर्भ संस्था ने दिया। पुणे महानगरपालिका की ‘पीएमसी केयर 2.0’ प्रणाली पर लंबित शिकायतों और ऑनलाइन आवेदनों पर ‘रिकन्साइल एंड री-सबमिट’ जैसे अस्पष्ट उल्लेखों के कारण नागरिकों को होने वाली परेशानियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया।
संस्था ने सभी सरकारी सेवाओं के लिए 21 दिनों की निश्चित समयसीमा लागू करने, निर्धारित समय में निर्णय नहीं होने पर नियमानुसार ‘डीम्ड अप्रूवल’ का प्रावधान करने तथा जरूरी सेवाओं के लिए अलग त्वरित व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है। महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए प्राथमिकता के आधार पर सेवाएं, सरल प्रक्रिया और विशेष सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।
इसके अलावा, दूसरा अपील दाखिल करने की समयसीमा 60 दिन करने, अपील के आदेशों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ स्वतः कार्रवाई करने, बार-बार नियमों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा लंबित आवेदनों की जानकारी सार्वजनिक करने जैसे उपाय सुझाए गए हैं।
प्रत्येक विभाग में समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के साथ आवेदन की स्थिति, लंबित मामलों की अवधि और सेवा वितरण की कार्यक्षमता दर्शाने वाली ऑनलाइन व्यवस्था विकसित करने की मांग भी की गई है।
नागरिक सोशल फाउंडेशन ने कहा कि लोकसेवा का अधिकार केवल कानून में दर्ज अधिकार न रहकर नागरिकों को वास्तव में अनुभव होने वाला अधिकार बनना चाहिए। इसके लिए पारदर्शिता, निश्चित समयसीमा, प्रभावी शिकायत निवारण और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने वाली मजबूत व्यवस्था आवश्यक है।



