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समान भाषा के उपशीर्षकों से भाषा सीखने को मिलेगी गति

समान भाषा के उपशीर्षकों से भाषा सीखने को मिलेगी गति

प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह ने दूरदर्शन में ‘मराठी समान भाषा उपशीर्षक केंद्र’ का किया शुभारंभ

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान मुंबई महाराष्ट्र 

मुंबई,। दृश्य-श्रव्य माध्यमों में समान भाषा के उपशीर्षक उपलब्ध होने से भाषा को समझने और पढ़ने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इस पहल से निश्चित रूप से भाषा सीखने की प्रक्रिया को गति मिलेगी। यह विश्वास सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के प्रधान सचिव एवं महानिदेशक ब्रिजेश सिंह ने व्यक्त किया।

 

वरली स्थित दूरदर्शन केंद्र में ‘प्लैनेट रीड मराठी समान भाषा उपशीर्षक केंद्र’ का शुभारंभ ब्रिजेश सिंह के हाथों फीता काटकर किया गया। इसके बाद दूरदर्शन केंद्र के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस अवसर पर दूरदर्शन केंद्र मुंबई के उपनिदेशक (अभियांत्रिकी) हेमंत देसाई, गणेश अय्यर तथा आईआईटी दिल्ली के सहायक प्रोफेसर एवं ‘बिलियन रीडर्स’ के प्रमुख प्रो. ब्रिज कोठारी उपस्थित थे।

 

मराठी कार्यक्रमों में देवनागरी में होंगे उपशीर्षक

 

इस पहल के तहत दूरदर्शन के सह्याद्री चैनल पर प्रसारित होने वाले मराठी मनोरंजन कार्यक्रमों में मराठी भाषा के देवनागरी लिपि में उपशीर्षक उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे कार्यक्रम देखने वाले दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ मराठी पढ़ने का अवसर भी मिलेगा। इस पहल से मराठी भाषा के पठन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विद्यार्थियों के साथ-साथ श्रवण दिव्यांग लोगों को भी इसका विशेष लाभ मिलेगा।

 

क्षेत्रीय भाषा में उपशीर्षक उपलब्ध कराने की इस पहल की शुरुआत पहली बार महाराष्ट्र से की गई है। यह पहल राज्य सरकार, प्रसार भारती, आईआईटी दिल्ली और प्लैनेट रीड के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई है।

 

श्रवण दिव्यांगों के लिए भी उपयोगी पहल

 

प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह ने कहा कि इस अभिनव पहल के माध्यम से श्रवण दिव्यांग लोगों को भी कार्यक्रमों की कहानी, कथानक और पटकथा में होने वाली घटनाओं को समझने में सहायता मिलेगी। लिखित शब्द के महत्व को बनाए रखने वाली इस पहल की शुरुआत महाराष्ट्र से होना खुशी की बात है।

 

उन्होंने कहा कि मराठी भाषा अत्यंत समृद्ध है। दैनिक जीवन में मराठी बोलने वाले कई लोगों को लिखित भाषा की पूरी दुनिया तक पहुंच नहीं मिल पाती। ऐसे में लिखित शब्द के महत्व को कम नहीं होने देना चाहिए। समान भाषा के उपशीर्षक इसके लिए एक सरल और प्रभावी तकनीक आधारित उपाय हैं।

 

ब्रिजेश सिंह ने कहा कि लोगों का स्क्रीन पर समय बढ़ रहा है। ऐसे में उसी स्क्रीन पर समान भाषा के उपशीर्षक उपलब्ध होने से संदर्भ के साथ भाषा को आसानी से समझने और सीखने का अवसर मिलेगा। उपशीर्षकों के माध्यम से दर्शकों का भाषा के साथ संबंध मजबूत होगा और भाषा को समझने की क्षमता भी बढ़ेगी। विशेष रूप से श्रवण दिव्यांग व्यक्तियों के लिए यह पहल पर्दे पर दिखाई जाने वाली कहानी और घटनाक्रम को समझने में उपयोगी साबित होगी।

 

कार्यक्रम में प्रो. ब्रिज कोठारी ने प्रस्तावना के दौरान मराठी भाषा के प्रसार और पठन संस्कृति को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी। संतोष जाधव ने उपशीर्षक तैयार करने की प्रक्रिया का प्रस्तुतिकरण किया, जबकि देवेश कुमार ने ‘प्लैनेट रीड’ और भाषा उपशीर्षक पहल की जानकारी दी।

कार्यक्रम का संचालन लीनता घाग और पूर्वा कर्वे ने किया। चेतना पवार ने उपस्थित अतिथियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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