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सूखाग्रस्त विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करने का निर्णय स्वागतयोग्य

सूखाग्रस्त विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करने का निर्णय स्वागतयोग्य

 

डॉ. हुलगेश चलवादी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का जताया आभार

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र 

पुणे, । महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त तालुकों में रहने वाले विद्यार्थियों की परीक्षा फीस बिना किसी शर्त के माफ करने के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश का रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रदेश उपाध्यक्ष तथा चलवादी शिक्षण संस्था के अध्यक्ष डॉ. हुलगेश चलवादी ने स्वागत किया है। उन्होंने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण और राहत देने वाला है।

 

डॉ. चलवादी ने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है। खेती को नुकसान, आय में कमी और बढ़ती आर्थिक परेशानियों के चलते किसान परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। ऐसी परिस्थितियों में विद्यार्थियों की परीक्षा फीस का अतिरिक्त भार अभिभावकों पर न पड़े, इसके लिए राज्य सरकार द्वारा लिया गया निर्णय महत्वपूर्ण है।

 

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए और आर्थिक कठिनाइयों के चलते किसी विद्यार्थी को अपनी शिक्षा बीच में छोड़ने की स्थिति का सामना न करना पड़े। विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति में बाधा न आए, इसी दृष्टि से परीक्षा फीस माफी का निर्णय राहत देने वाला है।

 

महाराष्ट्र शासन के निर्णय के अनुसार राज्य के 34 जिलों के 265 सूखाग्रस्त तालुकों के विद्यार्थियों को परीक्षा फीस माफी का लाभ दिया जा रहा है। इसके अलावा बुधवार को राज्य के 40 और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इसके साथ ही राज्य में सूखाग्रस्त तालुकों की संख्या बढ़कर 305 हो गई है।

 

डॉ. चलवादी ने कहा कि शिक्षा समाज की प्रगति की आधारशिला है। आर्थिक परिस्थितियों के कारण किसी भी विद्यार्थी को शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से परीक्षा फीस माफी के निर्णय को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा इसका लाभ पात्र विद्यार्थियों तक समय पर पहुंचाने की अपेक्षा व्यक्त की।

 

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लिए गए इस प्रकार के जनहितकारी निर्णयों से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने में मदद मिलेगी और उनके शैक्षणिक भविष्य को मजबूती मिलेगी।

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