
अल-नीनो की पृष्ठभूमि में पुणे जिले में जलापूर्ति की योजना; स्थानीय निकायों को 20% पानी कटौती के निर्देश
31 अगस्त 2027 तक पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी की अध्यक्षता में बैठक
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे : अल-नीनो के संभावित प्रभाव की पृष्ठभूमि में उपलब्ध जलस्रोतों का मितव्ययी एवं योजनाबद्ध प्रबंधन कर 31 अगस्त 2027 तक पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई।
जिलाधिकारी कार्यालय में हुई बैठक में पुणे महानगरपालिका आयुक्त नवलकिशोर राम, पुणे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गजानन पाटील, जलसंपदा विभाग के मुख्य अभियंता अमोल कोल्हे, अधीक्षक अभियंता पृथ्वीराज फाळके, पुणे मनपा के मुख्य अभियंता श्री जगताप, श्री तारू सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
राज्य के 265 तालुकों में सूखा घोषित किए जाने की पृष्ठभूमि में उपलब्ध पानी का प्राथमिकता के आधार पर उपयोग करने की आवश्यकता पर बैठक में जोर दिया गया। शासन निर्णय 5 अक्टूबर 2026 के अनुसार उपलब्ध जलसाठे का विभिन्न उपयोगों के लिए सावधानीपूर्वक और मितव्ययी तरीके से इस्तेमाल करने के लिए जलसंपदा विभाग ने पानी का सूक्ष्म नियोजन किया है।
खडकवासला परियोजना में 15 अक्टूबर 2026 को मृतसाठा, वाष्पीकरण और बफर स्टॉक को छोड़कर लगभग 20 टीएमसी पानी उपलब्ध होने की जानकारी बैठक में दी गई। यह जलसाठा हर वर्ष की तुलना में करीब 25 प्रतिशत कम है। ऐसे में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराते समय कड़े नियोजन की आवश्यकता होगी। बारिश की वापसी न होने के कारण पानी के उपयोग पर भी सीमाएं आने की संभावना जताई गई।
इस पृष्ठभूमि में जलसंपदा विभाग ने पुणे शहर की जलापूर्ति में 25 प्रतिशत कटौती की आवश्यकता जताई। वहीं अधीक्षक अभियंता पृथ्वीराज फाळके ने शहर में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति करने का प्रस्ताव रखा।
स्थानीय निकायों को 20% पानी कटौती के निर्देश
पवना, भामा आसखेड, चासकमान और नीरा प्रणाली की परियोजनाओं में 90 से 95 प्रतिशत जलसाठा उपलब्ध होने के बावजूद 31 अगस्त 2027 तक जलापूर्ति बनाए रखने के लिए सभी स्थानीय स्वशासी संस्थाओं को 20 प्रतिशत पानी कटौती की दिशा में नियोजन करने के निर्देश दिए गए।
उपलब्ध पानी को ध्यान में रखते हुए रबी सीजन के लिए सिंचाई आवर्तन दिया जाएगा। हालांकि, सभी परियोजनाओं के जलसाठे का नियोजन करने के बाद गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी बचने की संभावना नहीं है। इसलिए ग्रीष्मकालीन सिंचाई आवर्तन देना संभव नहीं होगा, यह बैठक में स्पष्ट किया गया।
अनधिकृत पानी उठाव रोकने के लिए संयुक्त दल
अनधिकृत रूप से पानी उठाने पर तत्काल रोक लगाने के लिए राजस्व, महावितरण, पुलिस और जलसंपदा विभाग के संयुक्त उड़नदस्ते गठित करने के निर्देश दिए गए। अवैध पानी उठाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पंप और मोटर जब्त करने के साथ ही पानी चोरी पाए जाने पर महावितरण विभाग द्वारा संबंधितों के बिजली कनेक्शन काटने की कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
आवश्यक स्थानों पर पुलिस बंदोबस्त उपलब्ध कराने के साथ ही कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए प्रतिबंधात्मक उपाय करने पर भी जोर दिया गया।
जिलाधिकारी जितेंद्र डुडी ने कहा कि उपलब्ध जलसाठे का कड़ाई से प्रबंधन, अनधिकृत पानी उठाव पर नियंत्रण और पेयजल को प्राथमिकता देकर आगामी गर्मी में पानी की कमी के खतरे को कम करने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्रवाई करनी होगी।
बैठक में जलसंपदा विभाग सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

