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सीतामढ़ी सदर अस्पताल में नवनियुक्त स्वास्थ्य कर्मियों को नेतृत्व एवं सेवा भावना का पाठ

सीतामढ़ी सदर अस्पताल में नवनियुक्त स्वास्थ्य कर्मियों को नेतृत्व एवं सेवा भावना का पाठ

 

62 नवनियुक्त स्टाफ नर्स व तकनीकी कर्मियों का हुआ संवेदीकरण, मरीजों के प्रति सहानुभूति, संवेदनशीलता और बेहतर व्यवहार पर दिया गया जोर

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान सीतामढ़ी बिहार 

सीतामढ़ी। सदर अस्पताल सीतामढ़ी में नवनियुक्त 62 स्टाफ नर्स, तकनीशियन एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को लीडरशिप और सेवा भावना को लेकर संवेदीकृत किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों एवं उनके परिजनों के प्रति संवेदनशील व्यवहार, धैर्यपूर्वक सेवा तथा बेहतर संवाद को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

 

संवेदीकरण सत्र में सिविल सर्जन सीतामढ़ी डॉ. आर. के. यादव, अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. मनोज कुमार, अस्पताल प्रबंधक विजय चंद्र झा, पीरामल फाउंडेशन के कार्यक्रम प्रबंधक प्रभाकर कुमार तथा कार्यक्रम लीड रोहित कुमार एवं दुर्गा प्रसाद ने नवनियुक्त कर्मियों को स्वास्थ्य सेवा में नेतृत्व और सेवा भावना के महत्व से अवगत कराया।

 

सत्र के दौरान Sympathy, Empathy, Active Listening और Non-Violent Communication (NVC) जैसे विषयों को सरल उदाहरणों के माध्यम से विस्तार से समझाया गया। स्वास्थ्य कर्मियों को बताया गया कि अस्पताल में आने वाला मरीज केवल उपचार की अपेक्षा लेकर नहीं आता, बल्कि वह स्वास्थ्य कर्मियों से सहयोग, संवेदनशीलता, सम्मान और सकारात्मक व्यवहार की भी उम्मीद करता है। ऐसे में मरीज की बात को धैर्यपूर्वक सुनना, उसकी परिस्थिति और भावनाओं को समझना तथा सम्मानजनक तरीके से संवाद करना प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मी की जिम्मेदारी है।

 

इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. आर. के. यादव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा का मूल उद्देश्य मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ उसके प्रति मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण बनाए रखना है। “धैर्य और सेवा भावना के साथ मरीजों की सेवा करना हम सभी का पहला कर्तव्य है। मरीज और उनके परिजनों के साथ किया गया अच्छा व्यवहार भी अच्छी स्वास्थ्य सुविधा की पहचान है।”

 

संवेदीकरण के दौरान नवनियुक्त कर्मियों को “Self Change to System Change” की अवधारणा से भी परिचित कराया गया। बताया गया कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से करनी होगी। जब प्रत्येक स्वास्थ्य कर्मी अपने कार्य, व्यवहार, संवाद और जिम्मेदारी में सकारात्मक परिवर्तन लाएगा, तभी संस्थागत एवं व्यवस्थागत बदलाव को स्थायी रूप दिया जा सकेगा।

 

सत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया कि लीडरशिप केवल किसी पद या जिम्मेदारी का नाम नहीं है, बल्कि अपने व्यवहार और कार्य से दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करना भी नेतृत्व है। अस्पताल में टीम भावना, आपसी सम्मान, सक्रिय संवाद और सेवा भाव से कार्य करने पर न केवल मरीजों का विश्वास बढ़ता है, बल्कि स्वास्थ्य संस्थान की कार्यसंस्कृति और सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

 

कार्यक्रम का उद्देश्य नवनियुक्त स्वास्थ्य कर्मियों में शुरुआत से ही सेवा भावना, संवेदनशीलता, जवाबदेही और सकारात्मक नेतृत्व की संस्कृति विकसित करना था, ताकि सदर अस्पताल आने वाले प्रत्येक मरीज को सम्मानजनक, संवेदनशील एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का अनुभव मिल सके।

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