
भीमनगर के निवासियों को वहीं घर देकर न्याय दिया जाए – वरिष्ठ समाजसेविका मेधा पाटकर की मांग
पुणे (डी एसतोमर)– पौड रोड स्थित भीमनगर के निवासियों की सहमति के बिना झोपड़पट्टी पुनर्वास प्राधिकरण द्वारा घर खाली कराने के लिए जारी की गई नोटिस को तुरंत वापस लिया जाए और निवासियों को उसी स्थान पर पुनर्वासित कर न्याय दिया जाए, ऐसी मांग वरिष्ठ समाजसेविका मेधा पाटकर ने की है।
रिपब्लिकन युवा मोर्चा के अध्यक्ष राहुल डंबाळे के आह्वान पर मेधा पाटकर ने भीमनगर का दौरा किया और वहां के लोगों की समस्याएं एवं भावनाएं जानकर उनके आंदोलन को समर्थन दिया। इस दौरान देविदास ओहाळ और अन्य स्थानीय निवासी भी उपस्थित थे।
भीमनगर पुनर्वास योजना के तहत भक्ती इंटरप्राइजेस नामक संस्था ने निवासियों को वहीं पर अच्छे घर देने का आश्वासन दिया था। हालांकि, 70% परिवारों की सहमति प्राप्त होने से पहले ही 50 परिवारों को वारजे स्थानांतरित कर दिया गया, जिनमें से 15 परिवार वापस भीमनगर लौट आए। इन परिवारों को जो इमारत दी गई थी, वह बिल्डर द्वारा नहीं बल्कि पुणे महानगरपालिका द्वारा बनाई गई थी। इसके बावजूद बाकी 35 परिवारों को बेदखली की नोटिस दी गई, जिसे पाटकर ने एक प्रकार की “फसवणूक” करार दिया।
पाटकर ने आरोप लगाया कि झोपड़पट्टी पुनर्वास प्रकल्पों में सबसे बड़ा घोटाला “विकास हक्क” (TDR) के हस्तांतरण में होता है। बस्तियों की जगह लेकर गरीबों को दूर फेंक दिया जाता है। पात्रता निर्धारण में भी अपारदर्शिता बरती जाती है। उन्होंने बताया कि कुछ नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से बिल्डर ने बिना निर्माण किए करोड़ों का टीडीआर घोटाला किया है।
मेधा पाटकर ने कहा कि जिस तरह पुरानी हाउसिंग सोसायटीज़ को पुनर्विकास का अधिकार है, उसी तरह झोपड़पट्टियों को भी “स्वयंविकास” का अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन बिल्डरों, अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत इस अधिकार को दबा देती है।

उन्होंने कहा कि भीमनगर के 90% निवासी दलित और श्रमिक वर्ग से आते हैं और वे संविधान के अनुसार न्याय की मांग कर रहे हैं। उन पर अन्याय नहीं होना चाहिए। पुणे महानगरपालिका, एसआरए, शिकायत निवारण प्राधिकरण और महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग को उन्हें न्याय देना चाहिए।
राहुल डंबाळे ने कहा कि भीमनगर राज्य की एकमात्र ऐसी बस्ती है जिसके जमीन के सात-बारह दस्तावेज निवासियों के नाम पर हैं। इसके बावजूद स्थानीय नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से बिल्डर के हित में काम कर बस्तीवासियों को विस्थापित किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में सभी जिम्मेदार अधिकारियों और बिल्डर पर अॅट्रॉसिटी कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
इस अवसर पर स्थानीय निवासियों ने अपनी समस्याएं सामने रखीं, खासतौर पर जो लोग नई जगह पर स्थानांतरित हुए हैं, उनकी भी समस्याएं बताई गईं।

