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जनगणना —2027 के अंतर्गत सभी परिवार स्व-गणना प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भाग लें।

जनगणना —2027 के अंतर्गत सभी परिवार स्व-गणना प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भाग लें।

अपने परिवार की सही एवं पूर्ण जानकारी दर्ज करें।––जिलाधिकारी

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:सीतामढ़ी,बिहार 

ज्ञान भारतम् मिशन” देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे आधुनिक तकनीक से जोड़कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजने की एक दूरदर्शी पहल है––जिलाधिकारी

 

बिहार में जनगणना– 2027 की शुरुआत 17 अप्रैल 2026 से हो गई है।पहले चरण में राज्य के लोगों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का मौका मिलेगा।यह स्व-गणना प्रक्रिया 17 अप्रैल से 1 मई 2026 तक चलेगी।इस दौरान लोग घर बैठे जनगणना पोर्टल पर जाकर अपने परिवार और मकान से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

इस संबंध में आज समाहरणालय स्थित विमर्श सभा कक्ष में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में डीएम ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि

सरकार ने इसके लिए आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in शुरू किया है. इस पोर्टल पर परिवार के मुखिया के नाम ,10 अंकों का मोबाइल नंबर,ई मेल आईडी(वैकल्पिक) दर्ज करना है।रजिस्ट्रेशन के बाद नागरिकों को 33 सवालों के जवाब भरने होंगे।

 

इन सवालों में मकान की स्थिति, फर्श, दीवार और छत किससे बनी है, कितने लोग रहते हैं, परिवार के सदस्यों की संख्या, पानी, बिजली, शौचालय, रसोई, गैस कनेक्शन, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन और दूसरी जरूरी सुविधाओं की जानकारी मांगी जाएगी।उन्होंने कहा कि

ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद हर परिवार को एक सेल्फ एन्यूमरेशन आईडी मिलेगी।इस आईडी को संभालकर रखना जरूरी होगा। अगले महीने जब प्रगणक घर आएंगे, तब यही आईडी उन्हें दिखानी होगी।इसके आधार पर वे दर्ज की गई जानकारी को वेरीफाई करेंगे।

 

उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था से आम लोगों की सीधी भागीदारी बढ़ेगी।इससे जनगणना का काम ज्यादा सटीक, तेज और आधुनिक बनेगा।उन्होंने कहा कि यह कदम जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में अहम पहल है।

 

जिलाधिकारी की अपील:जिलाधिकारी ने जिलेवासियों से अपील की है कि इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में आप सभी की सक्रिय भागीदारी अपेक्षित है। स्व-गणना के माध्यम से अब प्रत्येक नागरिक स्वयं अपने परिवार एवं सदस्यों से संबंधित जानकारी ऑनलाइन पोर्टल/मोबाइल ऐप के जरिए सुरक्षित एवं सरल तरीके से दर्ज कर सकता है।उन्होंने कहा कि सभी परिवार स्व-गणना प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भाग लें।

अपने परिवार की सही एवं पूर्ण जानकारी दर्ज करें।

किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाहों से बचें। जनगणना न केवल जनसंख्या का आकलन है, बल्कि यह सरकार की योजनाओं, संसाधनों के वितरण एवं विकास कार्यों की आधारशिला भी है। अतः आपकी सही जानकारी जिले एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

हम सभी मिलकर इस राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करें और अपने जिले को पूर्ण एवं सटीक जनगणना में अग्रणी भूमिका निभाएं।

जिलाधिकारी ने “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत पांडुलिपियों के संरक्षण व डिजिटलीकरण कार्य को लेकर मीडिया को किया ब्रीफ।

 

“ज्ञान भारतम् मिशन” देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे आधुनिक तकनीक से जोड़कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजने की एक दूरदर्शी पहल है––जिलाधिकारी

 

मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कम-से-कम 75 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों—जैसे कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र और कपड़े पर लिखित सामग्री—की पहचान, सर्वेक्षण, कैटालॉगिंग और संरक्षण किया जा रहा है।

कहा कि सीतामढ़ी जिले में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के अंतर्गत प्राचीन एवं ऐतिहासिक महत्व की पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण की दिशा में कार्य को गति दी जा रही है।इस मिशन के तहत सीतामढ़ी जिले में सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, पुस्तकालयों तथा व्यक्तियों के पास उपलब्ध कम-से-कम 75 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों—जैसे कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र और कपड़े पर लिखित सामग्री—की पहचान, सर्वेक्षण, कैटालॉगिंग और संरक्षण की प्रक्रिया की जा रही है।

इन पांडुलिपियों को डिजिटाइज कर ‘ज्ञान भारतम् पोर्टल’ के माध्यम से आम लोगों, खासकर वर्तमान पीढ़ी के लिए सुलभ बनाया जाएगा, ताकि इस धरोहर को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

 

इस संबंध में जिलाधिकारी श्री रिची पांडेय ने बताया कि इस योजना का महत्व केवल पांडुलिपियों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसके माध्यम से लुप्त होती प्राचीन हस्तलिखित धरोहरों को सुरक्षित कर उन्हें डिजिटल रूप में व्यापक पहुंच प्रदान की जा रही है। यह शोधार्थियों, विद्यार्थियों और इतिहासकारों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी, जिससे वे प्राचीन ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं का अध्ययन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे आधुनिक तकनीक से जोड़कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजने की एक दूरदर्शी पहल है।

 

जिलाधिकारी की अपील: सीतामढ़ी के सभी नागरिकों, स्कूल-कॉलेज, मठ-मंदिर, पुस्तकालय, निजी संस्थान और समाज के हर जिम्मेदार व्यक्ति से एक छोटी-सी लेकिन बहुत महत्वपूर्ण अपील।

 

हम सब जानते हैं कि हमारे देश की ज्ञान परंपरा कितनी समृद्ध रही है। हमारे गांव-शहरों में आज भी कई ऐसी पुरानी पांडुलिपियाँ मौजूद हैं जो कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़े या धातु पर लिखी गई हैं। ये सिर्फ पुराने कागज़ नहीं हैं, बल्कि हमारी विरासत और हमारी पहचान हैं। समय के साथ इनके नष्ट होने का खतरा बढ़ रहा है, इसलिए इन्हें सुरक्षित करना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।

 

इसी उद्देश्य से “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत हम सीतामढ़ी जिले में पांडुलिपियों की पहचान, सूचीकरण और डिजिटलीकरण का अभियान चला रहे हैं। आपसे बस इतना सहयोग चाहिए कि यदि आपके पास या आपके आसपास “75 साल या उससे पुरानी” कोई पांडुलिपि हो, तो उसकी जानकारी जिला प्रशासन तक जरूर पहुँचाएँ।

 

आप हमें संस्था/व्यक्ति का नाम, मोबाइल या ईमेल, पांडुलिपियों की अनुमानित संख्या, उनकी भाषा या विषय और उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी दे सकते हैं। इससे हमें उन्हें सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।

 

सबसे महत्वपूर्ण बात — पांडुलिपि आपके पास ही सुरक्षित रहेगी। प्रशासन सिर्फ उन्हें स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित करेगा, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस ज्ञान का लाभ उठा सकें।

आइए, हम सब मिलकर अपनी इस अनमोल धरोहर को बचाने का संकल्प लें और वैशाली को इस दिशा में एक मिशाल बनाएं।

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