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विज्ञान का समर्थन: इंदुलेखा भृंग हेयर ग्रोथ सीरम की दूसरी क्लिनिकल स्टडी सफल, 90 दिनों में नए बाल उगने का दावा

विज्ञान का समर्थन: इंदुलेखा भृंग हेयर ग्रोथ सीरम की दूसरी क्लिनिकल स्टडी सफल, 90 दिनों में नए बाल उगने का दावा

रिपोर्ट विशाल समाचार 

पुणे:  मुंबई महाराष्ट्र 

मुंबई,  आयुर्वेदिक हेयर केयर ब्रांड Indulekha ने अपने इंदुलेखा भृंग हेयर ग्रोथ सीरम पर दूसरी बड़ी क्लिनिकल स्टडी सफलतापूर्वक पूरी करने की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार, इस अध्ययन ने उत्पाद को भारत में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हेयर ग्रोथ सीरम के रूप में और मजबूत आधार प्रदान किया है।

कंपनी द्वारा साझा किए गए अध्ययन के अनुसार, 90 दिनों के भीतर लगभग 11,000 नए बालों की वृद्धि दर्ज की गई। साथ ही यह दावा किया गया कि यह सीरम 3 प्रतिशत रेडेंसिल आधारित सीरम की तुलना में दोगुनी तेजी से बाल बढ़ाने में सक्षम पाया गया।

अध्ययन में एनाजेन-टू-टेलोजेन (A:T) अनुपात में 74 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया, जिसे स्वस्थ बाल वृद्धि चक्र की बहाली का संकेत माना जाता है। यह परीक्षण त्वचा रोग विशेषज्ञों और आयुर्वेद चिकित्सकों की निगरानी में पंजीकृत क्लिनिकल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन द्वारा किया गया।

Unilever के हेयरकेयर वाइस प्रेसिडेंट साईराम सुब्रमण्यन ने कहा कि कंपनी पारंपरिक आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन और आधुनिक वैज्ञानिक परीक्षणों को साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लगातार दो वर्षों तक स्वतंत्र क्लिनिकल परीक्षण कराए गए ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर भरोसा मिल सके।

कंपनी के अनुसार, यह सीरम बालों की जड़ों के स्तर पर असर दिखाता है और प्राकृतिक हेयर ग्रोथ साइकिल को समर्थन देता है। अध्ययन में शामिल 97 प्रतिशत प्रतिभागियों ने माना कि इससे बाल घने हुए और उनकी गुणवत्ता में सुधार हुआ।

अध्ययन वर्ष 2024 और 2025 के दौरान 20 से 45 वर्ष आयु वर्ग के पुरुषों और महिलाओं पर किया गया। इसमें नए बालों की वृद्धि, बाल झड़ने की दर, फॉलिकल की मजबूती और स्कैल्प हेल्थ जैसे विभिन्न मानकों का मूल्यांकन किया गया।

प्रतिभागियों के अनुभव के अनुसार:

• 100 प्रतिशत लोगों ने बाल अधिक घने होने की बात कही।

• 97 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बाल झड़ना कम होने का दावा किया।

• 97 प्रतिशत लोगों ने बालों की घनता में सुधार महसूस किया।

कंपनी ने बताया कि वर्ष 2024 की क्लिनिकल स्टडी के निष्कर्ष पहले ही प्रकाशित किए जा चुके हैं, जबकि 2025 की स्टडी के परिणाम ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च इन डर्मेटोलॉजी’ में प्रस्तुत किए गए हैं।

इंदुलेखा का कहना है कि उसके सभी क्लिनिकल अध्ययन भारतीय प्रतिभागियों पर किए जाते हैं, ताकि भारतीय स्कैल्प और बालों की प्रकृति के अनुरूप सटीक और उपयोगी निष्कर्ष प्राप्त हो सकें। कंपनी ने भविष्य में भी आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन के वैज्ञानिक परीक्षणों में निवेश जारी रखने की बात कही है।

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