
बारामती में ‘सीड्स ऑफ इंस्पिरेशन’ विषय पर प्रेरक व्याख्यान आयोजित
किसी भी परिस्थिति में हार न मानें, चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित करें : उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार
‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ के सिद्धांत पर समाज की उन्नति के लिए कार्य करें : सांसद सुधा मूर्ति
बारामती: प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आते हैं और समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं। ऐसे में किसी भी परिस्थिति में निराश या हताश न हों, बल्कि अनुकूल और प्रतिकूल दोनों स्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करें। यह प्रेरणादायी संदेश उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने विद्यार्थियों को दिया। उन्होंने कहा कि आगे भी वे जनसेवा के लिए समर्पित रहेंगी और दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के अधूरे सपनों को पूरा करने का प्रयास करेंगी।
विद्यानगरी स्थित ग. दि. मा. सभागार में “सीड्स ऑफ इंस्पिरेशन” विषय पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में उन्होंने यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में सांसद एवं वरिष्ठ समाजसेविका पद्मविभूषण सुधा मूर्ति, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गजानन पाटील, नगराध्यक्ष सचिन सातव, विद्या प्रतिष्ठान के ट्रस्टी राजीव शाह, एडवोकेट निलीमा गुजर सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
सुनेत्रा पवार ने कहा कि सुधा मूर्ति ने अपना संपूर्ण जीवन समाजसेवा और लोककल्याण के लिए समर्पित किया है। उनके कार्यों से समाज को नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर नई चीजें सीखने और अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि आज बारामतीवासियों को सुधा मूर्ति का अमूल्य मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है, जो सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने बताया कि सुधा मूर्ति बारामती के विकास से प्रभावित हैं और यहां के लोगों के स्नेह से अभिभूत होकर भविष्य में फिर बारामती आने की इच्छा व्यक्त कर चुकी हैं।
अपने संबोधन में सुधा मूर्ति ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में अच्छी आदतों और अच्छे संस्कारों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। स्वच्छता, अनुशासन, समय का सदुपयोग, धैर्य, कठिन परिश्रम और निर्णय लेने की क्षमता जैसे गुण जीवनभर सफलता दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान का व्यावहारिक उपयोग समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” के सिद्धांत के अनुसार समाज की उन्नति के लिए कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। माता-पिता और शिक्षक बच्चों पर अपनी अपेक्षाएं थोपने के बजाय उनकी क्षमता के अनुसार उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का अवसर दें। जैसे फूल की कली स्वाभाविक रूप से खिलती है, वैसे ही बच्चों को भी अपने स्वभाव और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।
सुधा मूर्ति ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन न तो आसान है और न ही कठिन, बल्कि इसमें सफलता और असफलता दोनों आती हैं। असफलता से घबराने के बजाय साहस के साथ आगे बढ़ें और जीवन के हर अनुभव का आनंद लें। उन्होंने माता-पिता, शिक्षकों और बुजुर्गों का सम्मान करने तथा अपने परिवार, मातृभाषा, विद्यालय, राज्य और देश के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का भाव रखने का भी संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के बल पर आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। बदलते समय के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रोबोटिक्स जैसी नई तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। साथ ही उन्होंने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं, इसलिए कृषि क्षेत्र में भी नवाचार और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का सुनेत्रा अजित पवार और सुधा मूर्ति ने विस्तार से उत्तर दिया। कार्यक्रम को नागरिकों, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला।


