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सामाजिक मुद्दों पर आंदोलन करें, हर बात पर इस्तीफे की मांग न करें’

सामाजिक मुद्दों पर आंदोलन करें, हर बात पर इस्तीफे की मांग न करें’

केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले का कॉक्रोच जनता पार्टी से आह्वान

रिपोर्ट:विशाल समाचार 

स्थान:पुणे प्रतिनिधि

 

केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आंदोलन करना और अपनी मांगों को रखना सभी का अधिकार है। लेकिन आंदोलन समाज और नागरिकों के वास्तविक मुद्दों के लिए होने चाहिए। हर मुद्दे पर एक के बाद एक इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर अपनी ताकत व्यर्थ नहीं गंवानी चाहिए।

 

इस अवसर पर शहराध्यक्ष संजय सोनवणे, उपमहापौर परशुराम वाडेकर, प्रदेश सचिव बालासाहेब जानराव, अण्णा वायदंडे, ब्राह्मण आघाड़ी के एडवोकेट मंदार जोशी, महिपाल वाघमारे, श्याम सदाफुले, नगरसेवक निलेश आल्हट, एडवोकेट हुलगेश चलवादी, बसवराज गायकवाड़, मोहन जगताप, विशाल शेवाळे, उमेश कांबळे, निलेश रोकडे, सुनील गवळी, मुश्ताक बाबर, श्रीकांत कदम और जयदेव रंधवे सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे।

 

आठवले ने कहा कि विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वंचितों, किसानों और भूमिहीनों के न्यायोचित अधिकारों के लिए आंदोलन अवश्य किए जाएं। लेकिन एक व्यक्ति का इस्तीफा लेने के बाद दूसरे का इस्तीफा मांगने के लिए लगातार आंदोलन करना उचित नहीं है। विद्यार्थियों को ऐसे आंदोलनों में शामिल करने के बजाय उनके भविष्य निर्माण और आर्थिक उन्नति पर ध्यान देना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संवाद लगभग समाप्त हो गया है, जबकि लोकतंत्र दोनों के सहयोग और स्वस्थ संवाद से ही मजबूत होता है। सरकार के अच्छे कार्यों का विपक्ष को स्वागत करना चाहिए और अपनी मांगें संवाद के माध्यम से सरकार के सामने रखनी चाहिए। सरकार को भी उन मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए।

 

रामदास आठवले ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर संसद में अनुपस्थित रहने का विपक्ष का आरोप निराधार है। उन्होंने कहा कि जिस मंत्रालय से संबंधित कार्य सदन में होता है, उसी मंत्री की उपस्थिति अपेक्षित होती है और अमित शाह अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं।

 

उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग को भी अनुचित बताया। आठवले ने कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का निर्णय किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है, न कि वाहनों को नुकसान पहुंचाने के लिए। यदि इथेनॉल के कारण वाहनों में तकनीकी समस्या आती है तो उसकी वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर नीति की समीक्षा की जा सकती है, लेकिन इसके आधार पर गडकरी जैसे सक्षम मंत्री का इस्तीफा मांगना उचित नहीं है।

 

आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आरक्षण समाज के वंचित वर्गों का अधिकार है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के प्रयासों से अनुसूचित जाति, जनजाति तथा घुमंतू-विमुक्त समाज को आरक्षण मिला और मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भी आरक्षण मिला। रिपब्लिकन पार्टी मराठा समाज को भी आरक्षण देने की समर्थक है। साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण परिवारों (जिनकी वार्षिक आय आठ लाख रुपये से कम है) को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि “आरक्षण हटाओ” की मांग संविधान की भावना के विरुद्ध है।

 

नीट जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नया कानून बनाया है, लेकिन केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। उसकी सख्ती से पालन कराने वाली प्रभावी व्यवस्था भी विकसित की जानी चाहिए।

 

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा की गई टिप्पणी को उन्होंने बेहद अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि सुनेत्रा पवार वरिष्ठ नेता पद्मसिंह पाटिल की पुत्री हैं और सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र का लंबा अनुभव रखती हैं। हाल की व्यक्तिगत त्रासदी से वे अभी पूरी तरह उबर नहीं पाई हैं, इसलिए उन पर इस प्रकार की टिप्पणी करना निंदनीय है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एक समय इंदिरा गांधी को भी इसी प्रकार के शब्दों से संबोधित किया गया था, लेकिन बाद में उन्होंने स्वयं को एक मजबूत प्रधानमंत्री के रूप में स्थापित किया।

 

मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाएं रोकने की जरूरत

 

आठवले ने वाकड पुलिस थाना क्षेत्र में छह और दस वर्ष के दो मासूम बच्चों के साथ हुए दुष्कर्म की घटना को अत्यंत अमानवीय बताया। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार से मुलाकात कर रिपब्लिकन पार्टी की ओर से 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। साथ ही, सामाजिक न्याय विभाग की ओर से जल्द ही 10 लाख रुपये की सहायता भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसी मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाओं को रोकने के लिए राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं और पूरे समाज को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।

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