पूणेप्रशासनमहाराष्ट्र

सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में 28 ज्ञानशिल्पों का लोकार्पण, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार बोलीं- ‘सावित्री की बेटी हूं’

सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में 28 ज्ञानशिल्पों का लोकार्पण, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार बोलीं- ‘सावित्री की बेटी हूं’

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान पुणे महाराष्ट्र 

पुणे, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय परिसर में क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले के जीवन, संघर्ष और परिवर्तनवादी विचारों पर आधारित 28 ज्ञानशिल्पों का लोकार्पण उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के हाथों किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इन ज्ञानशिल्पों के माध्यम से शिक्षा, मानवता, समानता, सामाजिक न्याय और सामाजिक परिवर्तन का संदेश नई पीढ़ी तक पहुंचेगा।

 

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. सुरेश गोसावी, प्र-कुलगुरु प्रो. डॉ. पराग काळकर, कुलसचिव प्रो. डॉ. कपिल पवार, आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश पांडे, प्रबंधन मंडल के सदस्य, प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

 

‘मैं सावित्री की बेटी हूं’

 

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिराव फुले के कार्यों का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। उन्होंने केवल एक पीढ़ी को शिक्षा नहीं दी, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के लिए सामाजिक परिवर्तन की राह तैयार की।

 

उन्होंने बताया कि ज्ञानशिल्पों में सावित्रीबाई फुले के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। पुणे के भिड़ेवाड़ा में लड़कियों के लिए पहली स्कूल शुरू करना, पहली महिला शिक्षिका के रूप में कार्य करना, बाल हत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना, कवयित्री एवं साहित्यकार के रूप में योगदान, सत्यशोधक आंदोलन में सहभागिता और प्लेग महामारी के दौरान मरीजों की सेवा जैसे कार्यों को इन शिल्पों में प्रस्तुत किया गया है।

 

सुनेत्रा पवार ने कहा कि एक ज्ञानशिल्प में आईना लगाकर उसके नीचे ‘मैं कौन?’ सवाल लिखा गया है। उन्होंने कहा, “जब मैंने उस आईने में देखा तो मेरे मन में भी यह सवाल आया। अगले ही क्षण महसूस हुआ कि मैं सावित्री की बेटी हूं। एक छोटे गांव के किसान परिवार में जन्मी मेरे जैसी लड़की को आज महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला है। इसके पीछे सावित्रीबाई के कार्यों की प्रेरणा है।”

 

शिक्षा की ज्योति आज भी दे रही प्रेरणा

 

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों की शिक्षा के लिए काम करते समय भारी विरोध और कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन अपने लक्ष्य से कभी पीछे नहीं हटे। सावित्रीबाई द्वारा प्रज्वलित शिक्षा की ज्योति आज देशभर में प्रकाश दे रही है। इसी शिक्षा और संघर्ष की ताकत से महिलाएं विज्ञान, शिक्षा, प्रशासन, उद्योग, खेल, रक्षा और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं।

 

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को जिजाऊ मां साहेब, क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले और पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर की महान विरासत मिली है। इन महान महिलाओं के आदर्शों से आज की पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।

 

फुले दंपती को भारत रत्न देने की मांग

 

सुनेत्रा पवार ने कहा कि पुणे के ऐतिहासिक भिड़ेवाड़ा में फुले दंपती का राष्ट्रीय स्मारक बनाने के लिए अजितदादा पवार ने लगातार प्रयास किए और आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने के लिए विशेष पहल की।

 

उन्होंने कहा कि फुले दंपती को भारत रत्न दिया जाए, यह महाराष्ट्र की भावना है। उनके महान कार्यों के उचित सम्मान के लिए महाराष्ट्र विधानसभा ने केंद्र सरकार से सर्वसम्मति से सिफारिश की है।

 

ज्ञानशिल्प नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का माध्यम’

 

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. सुरेश गोसावी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले के जीवन पर आधारित ज्ञानशिल्पों के माध्यम से नई पीढ़ी को उनके संघर्ष, शैक्षणिक कार्य और सामाजिक परिवर्तन के विचारों से परिचित कराया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि इन ज्ञानशिल्पों में लड़कियों की शिक्षा के लिए शुरू की गई पहली स्कूल, प्रौढ़ शिक्षा, सत्यशोधक आंदोलन में सहभागिता, वंचित और कमजोर वर्गों के लिए किए गए कार्य, समाज प्रबोधन, साहित्यिक योगदान, महात्मा फुले के साथ उनका जीवन तथा प्लेग महामारी के दौरान की गई लोकसेवा जैसे प्रसंगों को दर्शाया गया है।

 

कुलगुरु ने कहा कि ये ज्ञानशिल्प केवल चित्र नहीं हैं, बल्कि इतिहास और वर्तमान के बीच संवाद स्थापित करने का माध्यम हैं। विश्वविद्यालय परिसर में आने वाले विद्यार्थियों को इनके माध्यम से सावित्रीबाई के विचारों से परिचित होने और शिक्षा का उपयोग समाज परिवर्तन के लिए करने की प्रेरणा मिलेगी।

 

आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेश पांडे ने कहा कि ज्ञानशिल्पों का निर्माण केवल कलात्मक पहल नहीं, बल्कि सावित्रीबाई फुले के विचारों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि सावित्रीबाई फुले के स्मारक के लिए आवश्यक विभिन्न अनुमतियों से जुड़े मुद्दों को भी सुलझाया गया है।

 

28 ज्ञानशिल्पों का किया निरीक्षण

 

लोकार्पण के बाद उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित सभी 28 ज्ञानशिल्पों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रत्येक शिल्प के बारे में जानकारी ली और सावित्रीबाई फुले के जीवनकार्य के विभिन्न पहलुओं को समझा। उन्होंने ज्ञानशिल्पों की संकल्पना और निर्माण में शामिल सभी लोगों के कार्य की सराहना की।

 

इस अवसर पर शिल्पकार नवीन शेगमवार, आर्किटेक्ट धनंजय सालकर तथा समिति के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रो. डॉ. संजय चाकणे का विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम का आभार कुलसचिव प्रफुल्ल पवार ने माना।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button