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हाईकोर्ट का आदेश: माध्यमिक आचार्य भर्ती में नेहा कुमारी के लिए स्पेशल एजुकेशन का एक पद सुरक्षित

हाईकोर्ट का आदेश: माध्यमिक आचार्य भर्ती में नेहा कुमारी के लिए स्पेशल एजुकेशन का एक पद सुरक्षित

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान झारखंड राज्य 

Jharkhand High Court: झारखंड में माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा से जुड़े एक अहम मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए याचिकाकर्ता नेहा कुमारी के लिए स्पेशल एजुकेशन विषय में माध्यमिक आचार्य का एक पद सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने बुधवार को सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया. कोर्ट के इस निर्देश के बाद अब भर्ती प्रक्रिया में एक पद फिलहाल सुरक्षित रहेगा, जबकि मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी.

 

एक अंक नहीं मिलने पर कोर्ट पहुंची अभ्यर्थी

यह मामला नेहा कुमारी की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन के माध्यम से दायर रिट याचिका से जुड़ा है. याचिका में कहा गया है कि माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा के पेपर-1 में न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक 66 निर्धारित हैं. याचिकाकर्ता का दावा है कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा जारी आधिकारिक आंसर-की में जिस प्रश्न का उत्तर सही माना गया, उसी उत्तर का चयन उन्होंने भी किया था. इसके बावजूद उस प्रश्न का एक अंक उन्हें नहीं दिया गया. उनका कहना है कि आयोग की ओर से अंक नहीं मिलने के कारण उनका कुल स्कोर निर्धारित क्वालिफाइंग अंक से नीचे रह गया.

 

पेपर-2 का मूल्यांकन नहीं हुआ

याचिका में यह भी कहा गया कि एक अंक कम होने का सीधा असर आगे की चयन प्रक्रिया पर पड़ा. क्योंकि वह पेपर-1 में न्यूनतम अर्हता अंक हासिल नहीं कर सकीं, इसलिए पेपर-2 की कॉपी का मूल्यांकन ही नहीं किया गया. याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि विवादित प्रश्न का एक अंक जोड़ दिया जाए तो वह क्वालिफाइंग मार्क्स प्राप्त कर लेंगी और उनका पेपर-2 भी मूल्यांकन के दायरे में आएगा. इसी आधार पर उन्होंने अदालत से राहत देने की मांग की थी.

 

हाईकोर्ट ने दिया अंतरिम संरक्षण

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतरिम व्यवस्था के तहत स्पेशल एजुकेशन विषय में माध्यमिक आचार्य का एक पद सुरक्षित रखने का निर्देश दिया. इसका मतलब यह है कि अंतिम निर्णय आने तक उस पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, ताकि याचिकाकर्ता के संभावित अधिकार सुरक्षित रहें. कानूनी जानकारों के अनुसार, ऐसे मामलों में अदालत अक्सर अंतिम फैसला आने तक संबंधित पद सुरक्षित रखने का निर्देश देती है, जिससे बाद में यदि याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय आता है तो उन्हें न्यायिक राहत प्रभावी ढंग से मिल सके

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