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पुलिस अधीक्षक ने बताया—मानव तस्करी और देह व्यापार के नेटवर्क का सरगना गिरफ्तार

पुलिस अधीक्षक ने बताया—मानव तस्करी और देह व्यापार के नेटवर्क का सरगना गिरफ्तार

बेगूसराय के बखरी थाना क्षेत्र से मंजूर खलीफा गिरफ्तार, कई जिलों में नेटवर्क संचालित करने का आरोप

रिपोर्ट विशाल समाचार 

स्थान सीतामढ़ी बिहार 

सीतामढ़ी। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मानव तस्करी एवं देह व्यापार से संबंधित गतिविधियों के विरुद्ध प्राप्त इनपुट के आधार पर पुलिस लगातार निगरानी और कार्रवाई कर रही थी। इसी क्रम में एटीएस एवं कमजोर वर्ग प्रभाग, पुलिस मुख्यालय पटना से प्राप्त सूचना के आधार पर पुलिस उपाधीक्षक (यातायात) के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने 23 सितंबर को बेगूसराय जिले के बखरी थाना क्षेत्र के सलौना, नदौल में छापेमारी कर मंजूर खलीफा को गिरफ्तार किया।

 

पुलिस अधीक्षक के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी सीतामढ़ी थाना क्षेत्र के बोहा टोला, वार्ड नंबर-09 का रहने वाला है। अनुसंधान एवं पूछताछ में पुलिस के समक्ष ऐसे तथ्य सामने आए हैं कि आरोपी सीतामढ़ी, किशनगंज सहित अन्य जिलों में देश के विभिन्न राज्यों से लड़कियों को बहला-फुसलाकर अथवा झांसा देकर देह व्यापार में धकेलने वाले कथित नेटवर्क से जुड़ा था।

 

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। मामले में आगे की विधिसम्मत कार्रवाई जारी है। पुलिस के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 107 के तहत संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया भी की जा रही है।

 

कई मामलों में दर्ज है नाम

 

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मंजूर खलीफा का पूर्व आपराधिक इतिहास रहा है। उसके विरुद्ध वर्ष 2018 से 2026 तक सीतामढ़ी एवं मेहसौल थाना क्षेत्रों में मानव तस्करी, देह व्यापार, नाबालिगों के यौन शोषण तथा अन्य संबंधित अपराधों से जुड़े कुल 10 मामलों का उल्लेख पुलिस रिकॉर्ड में किया गया है।

 

इन मामलों में भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता (BNS), अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं।

 

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि अपराध नियंत्रण एवं जन-सुरक्षा के लिए पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

 

कानूनी सावधानी: खबर में आरोप एवं आपराधिक इतिहास पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर दिया गया है। गिरफ्तारी या प्राथमिकी अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है; अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

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