
हिंदू धर्म को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी – स्वाती गोयल शर्मा
अरुंधती फाउंडेशन की ओर से सामूहिक तर्पण, पूर्वजों और शहीदों को दी श्रद्धांजलि
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, (प्रतिनिधि): छत्रपति शिवाजी महाराज की महाराष्ट्र भूमि में फिल्मों के माध्यम से हिंदू धर्म को लेकर कई गलत धारणाएं फैलाए जाने का आरोप लगाते हुए खोजी पत्रकार स्वाती गोयल शर्मा ने कहा कि ऐसी प्रवृत्तियों के खिलाफ समाज को आवाज उठाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के आपत्तिजनक चित्रण को लेकर समाज को जागरूक रहने की जरूरत है।
अरुंधती फाउंडेशन और देव देवेश्वर संस्थान की ओर से सर परशुरामभाऊ महाविद्यालय के सभागार में सामूहिक तर्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शंखनाद, ओंकार स्तवन और मंत्रोच्चार के बीच धर्म एवं मातृभूमि के लिए बलिदान देने वाले पूर्वजों तथा शहीदों को तर्पण के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में वरिष्ठ विधिवेत्ता सदानंद फडके, देव देवेश्वर संस्थान के रमेश भागवत, अरुंधती फाउंडेशन के हिमांशु गुप्ते, आदित्य गुप्ते, धर्मशास्त्र शोधकर्ता आर्या जोशी और विद्याधर नारगोळकर उपस्थित रहे।
स्वाती गोयल शर्मा ने कहा कि हिंदी फिल्मों के माध्यम से हिंदू धर्म को लेकर गलत धारणाएं बनाए जाने के मामले सामने आते हैं। फिल्मों में धार्मिक विषयों के चित्रण और उसके समाज पर पड़ने वाले प्रभाव पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने सेंसर बोर्ड की भूमिका और फिल्मों को दिए जाने वाले प्रमाणपत्रों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के कारण फिल्मों की सामग्री पर नियंत्रण रखने वाली मौजूदा व्यवस्था की सीमाएं भी सामने आ रही हैं।
सामूहिक तर्पण के माध्यम से धर्मवीरों का स्मरण
अरुंधती फाउंडेशन के हिमांशु गुप्ते ने कार्यक्रम की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि हरिद्वार में घाट पर सामूहिक तर्पण होते देखने के बाद पुणे में भी इस तरह के आयोजन का विचार आया। पुणे की धरती को शिवकाल से ही अनेक धर्मवीरों के बलिदान का इतिहास प्राप्त है। इन वीरों का सामूहिक स्मरण हो और नई पीढ़ी को उनके इतिहास एवं परंपरा की जानकारी मिले, इसी उद्देश्य से कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
पितृपक्ष को लेकर भ्रम दूर करने की अपील
वरिष्ठ विधिवेत्ता सदानंद फडके ने कहा कि पितृपक्ष अशुभ होता है, यह धारणा गलत है। हिंदू संस्कृति में पूर्वजों का स्मरण करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए यह अवधि महत्वपूर्ण मानी जाती है। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष को लेकर मन में मौजूद भ्रम दूर कर इस परंपरा को उचित दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में स्वाती गोयल शर्मा का ‘जेम्स ऑफ बॉलीवुड’ नामक दृक-श्राव्य कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा अरुंधती फाउंडेशन की ओर से स्वाती गोयल शर्मा की संस्था को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। कार्यक्रम का संचालन आरजे बंड्या ने किया।

