पुणे जिले के 5 गांवों और 53 बस्तियों को टैंकर से पानी, 18,650 नागरिकों को राहत
294 नई बोरवेल योजनाओं को भी मंजूरी, जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन ने तेज किए प्रयास
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे,। पुणे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी से निपटने के लिए जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की ओर से विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। वर्तमान में जिले के 5 गांवों और 53 बस्तियों में 8 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इससे करीब 18 हजार 650 नागरिकों को राहत मिल रही है।
जलसंकट प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों को नियमित और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। जिले में अब तक औसतन 819 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो औसत वर्षा का करीब 95 प्रतिशत है। इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में जलस्रोतों पर दबाव बढ़ने के कारण टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
वर्तमान में बारामती, दौंड और इंदापुर तहसीलों में टैंकरों से जलापूर्ति जारी है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार नए टैंकरों को मंजूरी दी जा रही है।
कुएं और बोरवेल अधिग्रहित कर जलापूर्ति
जलसंकट प्रभावित क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था सुचारु रखने के लिए निजी अधिग्रहण के तहत कुओं और बोरवेल को अधिग्रहित कर जलापूर्ति की जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जिले में अधिकांश टैंकर फेरे निर्धारित योजना के अनुसार पूरे किए जा रहे हैं। जलापूर्ति व्यवस्था को संतोषजनक बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है।
33 नल जलापूर्ति योजनाओं की विशेष मरम्मत को मंजूरी
ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की मरम्मत एवं रखरखाव के लिए सरकार की ओर से 33 नल जलापूर्ति योजनाओं के विशेष मरम्मत कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इसके अलावा जलस्रोतों को मजबूत करने के लिए 10 कार्य तथा कुओं को गहरा करने और गाद निकालने के 21 कार्यों को भी मंजूरी मिली है। इन कार्यों के लिए करीब 5 करोड़ 36 लाख रुपये की निधि स्वीकृत की गई है।
क्षेत्रीय जलापूर्ति योजनाओं में मोरगांव, प्रादेशिक बेले और प्रादेशिक शिवरी योजनाओं के कार्य पूर्ण हो चुके हैं।
611 बोरवेल की मरम्मत को मंजूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जिले में 611 बोरवेल की मरम्मत को मंजूरी दी गई है। इन कार्यों के लिए करीब 2 करोड़ 56 लाख रुपये की निधि स्वीकृत की गई है। बंद पड़ी अथवा कम क्षमता से चल रही बोरवेल के दोबारा शुरू होने से ग्रामीण नागरिकों को नियमित पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
294 नई बोरवेल योजनाओं को मंजूरी
बढ़ती पानी की कमी को देखते हुए जिले में 294 नई बोरवेल योजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। इन कार्यों के लिए करीब 2 करोड़ 49 लाख रुपये की निधि स्वीकृत की गई है। संबंधित बोरवेल की खुदाई का कार्य पूरा हो चुका है। नई बोरवेल योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त जलस्रोत उपलब्ध होंगे और नागरिकों को पानी की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
2027 तक संभावित जलसंकट का आराखड़ा तैयार
जिला प्रशासन और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की ओर से जलसंकट से निपटने के लिए आवश्यक उपाय तत्काल प्रभाव से किए जा रहे हैं। वहीं अक्टूबर 2026 से जून 2027 के दौरान संभावित जलसंकट को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि जलसंकट प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों को नियमित पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी जलस्रोतों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

