
नवरात्र में दृष्टिहीन महिला उद्यमियों का औक्षण कर किया सम्मान, बिक्री सामग्री देकर स्वावलंबन को बढ़ावा
‘मदद नहीं, अवसर दें’ की सोच के साथ जय गणेश व्यासपीठ और गणेश मंडलों की पहल
रिपोर्ट विशाल समाचार
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पुणे। नवरात्रोत्सव के दौरान जहां देवी शक्ति की आराधना की जाती है, वहीं पुणे में स्त्रीशक्ति को सम्मान देने और जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल की गई। जय गणेश व्यासपीठ, पुणे शहर की ओर से ‘मदद नहीं, अवसर दें’ की सोच के साथ दृष्टिहीन महिला उद्यमियों को उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक बिक्री सामग्री उपलब्ध कराई गई।
पुणे रेलवे स्टेशन सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर चिक्की, अगरबत्ती, धूप-बत्ती, खिलौने और कटलरी जैसी वस्तुओं की बिक्री कर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाली नौ दृष्टिहीन महिला उद्यमियों का इस अवसर पर सम्मान किया गया। महिलाओं का औक्षण कर उनका अभिनंदन किया गया और उन्हें व्यवसाय में उपयोगी बिक्री सामग्री वितरित की गई।
इस पहल के माध्यम से महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और संघर्ष को सम्मान देने के साथ ही उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए व्यावहारिक सहयोग उपलब्ध कराया गया। आयोजकों का कहना था कि किसी व्यक्ति को केवल आर्थिक मदद देने के बजाय उसे अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर देना अधिक महत्वपूर्ण है।
नवरात्र में स्त्रीशक्ति का अनोखा सम्मान
बुधवार पेठ स्थित साईनाथ मंडल ट्रस्ट, अरण्येश्वर स्थित एकता मित्र मंडल और भवानी पेठ स्थित श्री शिवाजी मित्र मंडल के संयुक्त सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान सभी महिला उद्यमियों का पारंपरिक रूप से औक्षण कर उनका सम्मान किया गया। इसके बाद उनके व्यवसाय में उपयोगी बिक्री सामग्री प्रदान की गई।
इस अवसर पर शिल्पकार विवेक खटावकर, वैशाली खटावकर, सिद्धेश्वर मंदिर के ट्रस्टी बालासाहेब पाटोले और कुमार आणवेकर के हाथों बिक्री सामग्री का वितरण किया गया।
‘मदद नहीं, अवसर दें’ का संदेश
कार्यक्रम के दौरान शिल्पकार विवेक खटावकर ने कहा कि त्योहारों की वास्तविक सार्थकता केवल पूजा-अर्चना में नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर देने में है। दृष्टिहीन महिला उद्यमियों को सहायता के बजाय उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए अवसर और संसाधन उपलब्ध कराना समाज के प्रति जिम्मेदारी और मानवता का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि ‘मदद नहीं, अवसर दें’ की सोच के साथ किया गया यह प्रयास महिलाओं के आत्मसम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इस पहल के लिए अद्वैत परिवार की ‘मदद नहीं, अवसर दें’ अवधारणा के तहत संतोष डिंबले, सोमनाथ कांबले, कृष्णा घुले और नगरसेविका शैलजाताई भोसले का विशेष सहयोग मिला।
आयोजकों और सहयोगियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम का आयोजन पीयूष शाह, प्रल्हाद भाऊ थोरात और सुधीर ढमाले ने किया। इस अवसर पर नरेंद्र व्यास, ऋत्विक आदमूलवार, गंधाली शाह और हेरंब ढमाले सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की प्रस्तावना पीयूष शाह ने रखी, जबकि सुधीर ढमाले ने उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
नवरात्रोत्सव के अवसर पर आयोजित यह पहल धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और महिला सशक्तिकरण का संदेश देने वाली रही। दृष्टिहीन महिलाओं को उनके हुनर और मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर देकर आयोजकों ने स्वावलंबन और सम्मान के साथ जीवन जीने की भावना को मजबूत किया।
