हंगर पैंग्स लिमिटेड (बर्मा बर्मा रेस्टोरेंट्स) ने सेबी के पास दाखिल किया डीआरएचपी
डीआरएचपी लिंक: https://www.bseindia.com/corporates/download/360051/IPO%20Prior/HungerPangsLimitedDRHP_20261016223331.zip
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
हंगर पैंक्स लिमिटेड, जो ‘बर्मा बर्मा रेस्टोरेंट एंड टी रूम’ का स्वामित्व और संचालन करती है, ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) जमा कराया है। एफएंडएस रिपोर्ट के अनुसार, बर्मा बर्मा भारत की सबसे बड़ी विशेष बर्मी व्यंजन आधारित कैजुअल डाइनिंग रेस्टोरेंट चेन है। कंपनी प्रीमियम पैन-एशियन कैजुअल डाइनिंग सेगमेंट में काम करती है और यहां बर्मा की खानपान विरासत, संस्कृति और परंपराओं पर आधारित खास भोजन अनुभव उपलब्ध कराया जाता है।
कंपनी के प्रस्तावित आईपीओ में 2 रुपये अंकित मूल्य वाले शेयरों का 150 करोड़ रुपये तक का नया निर्गम और मौजूदा शेयरधारकों की ओर से 2,79,29,760 शेयरों तक की बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल है।
बिक्री पेशकश के तहत प्रवर्तक शेयरधारक अंकित वीरेंद्र गुप्ता और चिराग नरेंद्र छाजेड़ प्रत्येक 60 लाख शेयर तक बेचेंगे। वहीं, प्रवर्तक समूह की शेयरधारक कंपनी बीबिगप्लास पॉली प्राइवेट लिमिटेड 42 लाख शेयर तक की बिक्री करेगी। निवेशक शेयरधारकों में नेगेन टेक ऑपर्च्युनिटीज एंजेल फंड 64,68,315 शेयर, वेंचर कैटालिस्ट्स एंजेल ग्रोथ फंड 27,72,000 शेयर और एलवी एंजेल फंड 5,25,315 शेयर तक बेचेंगे। अन्य शेयरधारकों में निसर्ग अजयकुमार वखारिया 15,48,540 शेयर, श्वेता शर्मा 2,58,090 शेयर और मेहुल किरीट मेहता 1,57,500 शेयर तक की बिक्री करेंगे।
नए निर्गम से प्राप्त शुद्ध राशि का इस्तेमाल भारत में नए बर्मा बर्मा रेस्टोरेंट खोलने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
हंगर पैंक्स ने बर्मी व्यंजनों को अपनी पहचान बनाया है। कंपनी भोजन के साथ सांस्कृतिक कहानियों, खास रेस्टोरेंट डिजाइन और ग्राहकों को अलग अनुभव देने पर जोर देती है। इसके रेस्टोरेंट बर्मा की विरासत से प्रेरित हैं। मेन्यू तैयार करने में खानपान से जुड़े शोध, नए प्रयोग और व्यवस्थित अनुसंधान एवं विकास प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। कंपनी अपने सभी रेस्टोरेंट में एक जैसा अनुभव बनाए रखने के लिए मानकीकृत रेसिपी, मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी), केंद्रीकृत खरीद और व्यवस्थित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का पालन करती है।
31 जुलाई 2026 तक कंपनी देश के नौ शहरों में 22 रेस्टोरेंट, एक डिलीवरी किचन और तीन वेयरहाउस संचालित कर रही थी। इसके रेस्टोरेंट प्रीमियम मॉल, प्रमुख बाजारों की सड़कों और कॉरपोरेट पार्कों में स्थित हैं। 30 जून 2026 तक कंपनी के 21 रेस्टोरेंट की कुल बैठने की क्षमता 1,991 सीट थी। वित्त वर्ष 2026 में प्रति बिल औसत खर्च 2,400 रुपये रहा।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी का परिचालन से राजस्व वित्त वर्ष 2025 के 106.10 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 155.50 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान कंपनी ने 46.56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसी अवधि में ईबीआईटीडीए 21.35 करोड़ रुपये से बढ़कर 25.68 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का ईबीआईटीडीए मार्जिन 16.51 प्रतिशत रहा।
कंपनी की विकास रणनीति में देशभर में रेस्टोरेंट नेटवर्क का विस्तार, नए ब्रांड और व्यंजन पेश करना, मेन्यू में लगातार नए प्रयोग करना और ग्राहकों के साथ जुड़ाव मजबूत करना शामिल है। नए रेस्टोरेंट खोलने के लिए कंपनी संबंधित क्षेत्र में ग्राहकों की संभावनाओं, प्रीमियम उत्पादों पर खर्च करने की क्षमता, पहुंच, संपत्ति की बनावट, स्थान की व्यावसायिक उपयोगिता और ब्रांड के अनुकूल होने जैसे पहलुओं का मूल्यांकन करती है। कंपनी नए कॉन्सेप्ट के जरिए अन्य पैन-एशियन व्यंजनों के अवसरों की भी तलाश कर रही है।
डाइन-इन कारोबार के अलावा कंपनी ने डिलीवरी कारोबार का भी विस्तार किया है। वित्त वर्ष 2026 में डिलीवरी कारोबार से परिचालन राजस्व का 10.76 प्रतिशत प्राप्त हुआ। कंपनी अपना ‘बर्मा बर्मा शॉप’ प्लेटफॉर्म भी संचालित करती है और डिलीवरी के साथ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले कारोबार (डी2सी) का विस्तार करने की योजना बना रही है। इसमें रेडी-टू-ईट और अन्य पैकेज्ड फूड उत्पाद शामिल हैं।
एफएंडएस रिपोर्ट के अनुसार, भारत का फुल-सर्विस डाइनिंग बाजार वित्त वर्ष 2026 में लगभग 1.52 लाख करोड़ रुपये का था। इसके वित्त वर्ष 2030 तक बढ़कर करीब 2.18 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान बाजार की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) लगभग 9.4 प्रतिशत रहने की संभावना है। वित्त वर्ष 2026 में कैजुअल डाइनिंग रेस्टोरेंट की हिस्सेदारी फुल-सर्विस डाइनिंग बाजार में 95 प्रतिशत से अधिक थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती प्रयोज्य आय, शहरीकरण, उपभोक्ताओं की बदलती पसंद, बाहर खाने की बढ़ती आवृत्ति और अलग तरह के भोजन अनुभवों की मांग से इस बाजार को गति मिलने की उम्मीद है। इस क्षेत्र में प्रीमियम सेवाओं की बढ़ती मांग और खास व्यंजनों व अनुभव आधारित रेस्टोरेंट की लोकप्रियता से बर्मा बर्मा जैसी संगठित रेस्टोरेंट चेन को देश के विभिन्न शहरों में विस्तार का अवसर मिलेगा।
पैंथोमैथ कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड इस आईपीओ की एकमात्र बुक रनिंग लीड मैनेजर है।

