
दुष्कालग्रस्त किसानों की सहायता के लिए सरकार का संवेदनशील कदम — डॉ. हुलगेश चलवादी
सामाजिक दायित्व निभाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के योगदान का रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने किया स्वागत
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में इस वर्ष उत्पन्न दुष्काल की स्थिति के कारण संकट में फंसे किसान भाइयों की सहायता के लिए महायुति सरकार द्वारा उठाया गया कदम सामाजिक दायित्व निभाने वाला और संवेदनशील है। दुष्कालग्रस्त किसानों की सहायता के लिए संवेदनशीलता दिखाते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय वन सेवा (आईएफएस) सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारियों से अक्टूबर 2026 के वेतन में से एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री सहायता निधि में देने का आह्वान किया गया है। सरकार द्वारा जारी किए गए इस शासनादेश का रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं चलवादी शिक्षण संस्था के अध्यक्ष डॉ. हुलगे श चलवादी ने स्वागत किया है।
डॉ. चलवादी ने कहा कि दुष्काल का सबसे अधिक प्रभाव किसान, खेतिहर मजदूर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में सरकार के राहत कार्यों को प्राथमिकता देना तथा प्रशासनिक तंत्र द्वारा सामाजिक संवेदना के साथ उसमें सहभागिता करना सकारात्मक पहल है। किसानों के संकट के समय सरकार और प्रशासन द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता स्वागतयोग्य है।
उन्होंने कहा कि दुष्काल के संकट से किसानों को स्थायी राहत प्रदान करने के लिए आर्थिक सहायता के साथ-साथ फसल क्षति का वस्तुनिष्ठ आकलन, मुआवजे का समय पर वितरण, जल संकट के समाधान के लिए प्रभावी उपाय तथा कृषि क्षेत्र के पुनर्निर्माण के लिए ठोस कदम उठाना भी आवश्यक है।
डॉ. चलवादी ने अपेक्षा व्यक्त की कि किसानों को तत्काल राहत के साथ दीर्घकालीन आधार भी मिले। उन्होंने शासन के इस प्रयास में सामाजिक संस्थाओं तथा समाज के दानदाताओं से भी योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसानों की आंखों से आंसू पोंछना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है। एकत्रित सहायता पारदर्शी तरीके से जरूरतमंद किसानों तक पहुंचे और उन्हें वास्तविक राहत मिले, यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
अधिकृत आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र के कुल 358 तहसीलों में से 265 तहसीलों को दुष्कालग्रस्त घोषित किया गया है। 30 सितंबर तक राज्य में 804.4 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जो मौसमी औसत की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत कम है। इस स्थिति के कारण मराठवाड़ा, विदर्भ सहित राज्य के अनेक क्षेत्रों के किसान संकट में फंसे हुए हैं, ऐसा डॉ. चलवादी ने कहा।


