
एमआईटी डब्ल्यूपीयू में दीयों की रोशनी में ‘दीपोत्सव’ की जगमगाहट
कर्मचारियों की कला ने किया दर्शकों को मंत्रमुग्ध; परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, : दीयों की जगमगाती रोशनी, रंगोली के रंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बहार के बीच एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी का ‘दीपोत्सव २०२६’ गुरुवार की शाम बड़े उत्साह और धूमधाम से संपन्न हुआ। ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले इस दीपोत्सव ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
यह कार्यक्रम संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड के शुभाशीर्वाद और कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कुलगुरु प्रो. डॉ. रविराज सीताराम, कुलसचिव डॉ. गणेश पोकले, डॉ. दत्ता दंडगे, डॉ. मृदुला कुलकर्णी और कुणाल मराठे ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
शाम होते ही पूरा डब्ल्यूपीयू परिसर आकर्षक रंगोली और दीपमालाओं से जगमगा उठा। कर्मचारियों ने दीपावली पर आधारित गीत, नाटक, एकल नृत्य, समूह नृत्य, कविता और हास्य प्रस्तुत कर अपनी कला का प्रदर्शन किया।

मुख्य आकर्षण रहा सिविल इंजीनियरिंग विभाग की प्रस्तुति
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सिविल इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत भारतीय नृत्यकला रही। परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश देने वाली इस प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा। विभिन्न राज्यों की संस्कृति, वेशभूषा, नृत्य और परंपरा की प्रस्तुति भी की गई।
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. डॉ. रविराज सीताराम ने कहा, “धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, पाड़वा और भाई दूज – ये पांचों दिन ही असली दीपावली हैं। यह त्योहार केवल दीये जलाने का नहीं, बल्कि मन के अंधकार को दूर करने का है।”
कुलसचिव डॉ. गणेश पोकले ने कहा, “शांति से जलती दीपमाला के मंद प्रकाश से साकार होने वाला दीपोत्सव भारतीय संस्कृति का सुंदर सपना है। अंधकार पर प्रकाश की, बुराई पर अच्छाई की और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक ही दीपावली है।”
दीपोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सभी कर्मचारियों के स्नेह-मिलन का आनंदोत्सव रहा। कार्यक्रम में सभी विभागों के डीन, डायरेक्टर, संचालक, शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


