पूणे

उद्योग में अनुसंधान, नाविन्य और ग्राहक अभिविन्यास को जोड़ा जाना चाहिए

उद्योग में अनुसंधान, नाविन्य और ग्राहक अभिविन्यास को जोड़ा जाना चाहिए
डॉ. प्रमोद चौधरी का प्रतिपादन; इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियर्स द्वारा जीवनगौरव पुरस्कार
 
पुणे : “ग्राहक-उन्मुख सेवा, नवाचार और ईमानदारी किसी भी उद्योग की सफलता में महत्वपूर्ण हैं। अनुसंधान, नवाचार और पर्यावरण-अनुकूल उद्योग देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके लिए नए उद्यमियों को तैयार किया जाना चाहिए,” ऐसा प्रतिपादन प्राज इंडस्ट्रीज के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. प्रमोद चौधरी जी ने कियाl
 
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियर्स (आईआईसीएचई) पुणे रीजनल सेंटर द्वारा डॉ. प्रमोद चौधरी को जीवनगौरव पुरस्कार प्रदान किया गया। वार्षिक सर्वसाधारण सभा के अवसर पर डॉ. चौधरी का मुख्य भाषण ‘प्राज इंडस्ट्रीज की प्रेरक यात्रा‘ पर दिया गया। सेनापति बापट रोड पर सुमंत मुळगावकर सभागृहात में आयोजित कार्यक्रम में ‘आयआयसीएचई‘ पुणे रिजनल सेंटर के मानद अध्यक्ष आलोक पंडित, सचिव डॉ. उत्कर्ष माहेश्वरी, कोषाध्यक्ष डॉ. प्रफुल्ल गर्गे, कार्यकारी समिति सदस्य यशवंत घारपुरे, प्राज इंडस्ट्रीज डॉ. प्रमोद कुंभार, डॉ. रवींद्र उटगीकर, घनश्याम देशपांडे, डिफेन्स इन्स्टिट्यूट ऑफ ऍडवान्सड टेक्नॉलॉजीचे डॉ. पवन खन्ना, ”आयआयसीएचई” पुणे रिजनल सेंटर के नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. सुयोग तराळकर एवं अन्य उपस्थित थे।
 
डॉ. प्रमोद चौधरी ने कहा, “एक ऐसे उद्योग-व्यापार संगठन का निर्माण करना जो हवामान बदल और डिजिटल परिवर्तन जैसी नई स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हो, वर्तमान समय में नेतृत्व की स्थिति में लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। हमें ऊर्जा, पानी, भविष्य में बढ़ता तापमान जैसी कई चीजों का सामना करना पड़ता है। तदनुसार, नई पीढ़ी को इन आसन्न समस्याओं से निपटने के लिए अनुसंधान पर अधिक जोर देना चाहिए।”
“पिछले चार दशकों से जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्वसनीय सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इसमें पर्यावरण मित्रता को भी जोड़ा जा रहा है। हम स्थायी ऊर्जा पर काम कर रहे हैं। उद्योग के साथ-साथ सामाजिक प्रतिबद्धता की भावना से कई सामाजिक गतिविधियाँ क्रियान्वित की जा रही हैं। विभिन्न गतिविधियाँ चल रही हैं पर्यावरण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई शैक्षणिक और सामाजिक संस्थानों से जोड़ा गया है और स्टार्टअप और उद्यमिता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है,” ऐसा भी डॉ. चौधरी ने कहा.

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