पूणे

संविधान में राम’ आधुनिक युग में राम का सही अर्थ

संविधान में राम’ आधुनिक युग में राम का सही अर्थ

एमआईटी डब्ल्यूपीयू में आयोजित एक कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार विजय बाविस्कर के अनुसार

भारतीय भाषा में राम कथा’ एवं ‘तुलसी रामायण की भूमिका’ पुस्तक का प्रकाशन

 

पुणे: “संविधान में राम, श्री राम जय राम जय जय राम यह वाक्य आधुनिक युग में राम का सही अर्थ बताता है। श्री राम शुरू से अंत तक सभी के जीवन में निहित हैं। राम जीवन का ब्रह्मांड हैं। इस नाम में बड़ी महिमा और मिठास है।” ऐसे विचार वरिष्ठ पत्रकार एवं दैनिक लोकमत के समूह संपादक विजय बाविस्कर ने व्यक्त किये.

मायर्स एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे के प्रख्यात लेखक, गांधी के जीवन, साहित्य और दर्शन के प्रखर विद्वान प्राचार्य डॉ. विश्वास पाटिल द्वारा लिखित पुस्तकों ‘भारतीय भाषा में राम कथा’ और ‘तुलसी रामायण की भूमिका’ के विमोचन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अरुण खोरे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।  कार्यक्रम की अध्यक्षता एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. विश्वनाथ दा ने की। कराड था।

साथ ही लेखक प्राचार्य डॉ. विश्वास पाटिल, अथर्व प्रकाशन के युवराज माली, एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कुलपति डॉ. आरएम चिटणीस और डॉ. मिलिंद पात्रे मौजूद थे।

विजय बाविस्कर ने कहा, “आधुनिक समय में बच्चों के जीवन पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए राम का नया रूप सामने है। हाल ही में रामनवमी के अवसर पर बच्चों के दोस्तों ने राम का अर्थ समझाते हुए सुझाव दिया कि पढ़ाई में आनंद लेने वाले राम, जमीन पर पसीना बहाने वाले श्रीराम, श्रीराम जय राम, जय जय राम… पत्रकार समाज का एक अंग हैं, इसलिए उन्हें आधुनिक युग में सकारात्मक पत्रकारिता करनी चाहिए।”

विजय बाविस्कर ने कहा, “अगर भागदौड़ के दौर में संपादकों और पत्रकारों को बुलाकर उन्हें मानसिक शांति का पाठ पढ़ाया जाए तो समाज में निश्चित रूप से बड़ा बदलाव आएगा। 90 किताबें लिख चुके लेखक विश्वास पाटिल को अब महात्मा गांधी और राम पर नई किताब लिखनी चाहिए।”

डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, “भारतीय संस्कृति का सच्चा दर्शन और परंपरा श्री राम हैं। राम सबसे महान गुण और वचन हैं। राम के जीवन ने मानव कल्याण के लिए जो रूपरेखा तैयार की है, वह सर्वश्रेष्ठ है। भारतीय दर्शन आने वाले समय में विश्व को दिशा देने का काम करेगा। इससे विश्व शांति आएगी।”

अरुण खोरे ने कहा, “आज के शासकों के हृदय में सच्चे राम को जगाना आवश्यक है। परंपरा की सात्विकता को बनाए रखते हुए नए विचार रखे जाने चाहिए। पुस्तक के अवसर पर भारतीय संस्कृति के अच्छे विचार को सामने लाया गया है। इस पुस्तक के अवसर पर यह समझ में आया है कि राम, गांधीजी और विनोबा एक सूत्र हैं। सभी को जीवन में राम का सात्विकता खोजना चाहिए। भारतीय भाषा तुलसी रामायण में रामकथा की भूमिका को लेखक ने अलग अंदाज में प्रस्तुत किया है।”

प्राचार्य डॉ. विश्वास पाटिल ने कहा, “राम विश्व संस्कृति के प्रतीक हैं। वाल्मीकि, कालिदास और तुलसीदास ने रामायण का वर्णन किया। साथ ही राम और कृष्ण को विश्व के संदर्भ में पूजा जाता है। अहिल्या के उद्धार के बाद गंगा के तट पर राम राज्य की स्थापना हुई। साथ ही राम की कथा की पहली श्रोता जगदंबा हैं।”

कार्यक्रम का परिचय एवं स्वागत भाषण डॉ. मिलिंद पात्रे द्वारा किया गया।

डॉ. सचिन गाडेकर ने संचालन किया। डॉ. निलवर्णा ने धन्यवाद दिया।

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