पूणे

एमआईटी डब्ल्यूपीयू में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व भारतरत्न लालबहादूर शास्त्री जयंती समारोह आयोजित, डॉ. श्रीपाल सबनीस ने विश्वात्मक गांधीवाद की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए

एमआईटी डब्ल्यूपीयू में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व भारतरत्न लालबहादूर शास्त्री जयंती समारोह आयोजित, डॉ. श्रीपाल सबनीस ने विश्वात्मक गांधीवाद की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए

 

पुणे: विशाल समाचार 

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी और माईर्स एमआईटी शिक्षण संस्थान समूह की ओर से “स्मरण महामानवों” अभिवादन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और भारतरत्न लालबहादूर शास्त्री की जयंती मनाई गई। समारोह में 89वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष और विचारक डॉ. श्रीपाल सबनीस मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

 

डॉ. श्रीपाल सबनीस ने कहा कि महात्मा गांधी के आंदोलन में हिंसा का अभाव था, जिस कारण उन्हें सम्पूर्ण विश्व ने स्वीकारा। लेकिन वर्तमान समय में विश्व के कुछ नेता जैसे डोनाल्ड ट्रम्प, व्लादिमीर पुतिन, किंग जोन और शी जिनपिंग हिंसक भूमिकाओं में हैं। इस कारण विभाजित और अस्थिर विश्व में “जगा और जगू दया” जैसे घोषणाएँ सुनने को मिल रही हैं। इज़राइल-पैलेस्टाइन संघर्ष और अमानुषता संयुक्त राष्ट्र की विफलताओं का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस संकटमय समय में विश्वात्मक गांधीवादी शांति और अहिंसा के सिद्धांतों की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में अन्य प्रमुख उपस्थित व्यक्ति थे:

अध्यक्षस्थानी: वरिष्ठ गांधीवादी विचारक उल्हासदादा पवार,शुभाशीर्वाद देने के लिए: माईर्स एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष प्रा. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड,सह व्यवस्थापकीय विश्वस्त और कार्यकारी संचालक: डॉ. सुचित्रा कराड-नागरे,कुलसचिव: डॉ. रत्नदीप जोशी,प्रसिद्ध गप्पाष्टक कार: डॉ. संजय उपाध्ये,डब्ल्यूपीयू के सीएओ: डॉ. प्रसाद खांडेकर,एडीटी विश्वविद्यालय के कुलसचिव: डॉ. महेश चोपड़े,अन्य गणमान्य सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित थे।

डॉ. श्रीपाल सबनीस ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विदेश यात्रा के दौरान भगवान गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी का उल्लेख करते हैं, लेकिन देश में गांधी के नाम पर राजनीतिक गलत प्रथाएँ चल रही हैं। लोकतंत्र में स्वतंत्रता होते हुए भी देश में हिंसक व्यक्ति देशभक्त माने जा रहे हैं, जो चिंताजनक है। महात्मा गांधी सत्य के पालन, सेवा और समर्पण, द्वेष और हिंसा के प्रतिकार में प्रेम और बंधुत्व के प्रतीक थे। उन्होंने साध्य और साधन में विवेक रखा और अहिंसा के माध्यम से हिंसा का उत्तर दिया।”

डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा कि सत्य, अहिंसा और शांति ही वास्तविक मानव जीवन के मूल तत्व हैं। महात्मा गांधी ने सभी धर्मग्रंथों से जीवन मूल्यों को आत्मसात कर शांति की दिशा में मार्गदर्शन किया। आज विश्व में बढ़ती अशांति और हिंसा के बीच गांधी का शांति संदेश अत्यंत प्रासंगिक है।

डॉ. उल्हास पवार ने कहा, “संयम और अहंकार पर नियंत्रण रखने से ही महात्मा गांधी और लालबहादूर शास्त्री की जयंती का सही अर्थ निकलता है। कस्तूरबा गांधी ने अफ्रीका में गांधी को असहकार का पहला पाठ दिया, वहीं रानडे ने मानवता, समता और नैतिकता के आधार पर संघर्ष के सिद्धांत बताए। लालबहादूर शास्त्री का साधापन और आचरण देश के लिए प्रेरणास्रोत रहे। अहंकार हिंसा और शत्रु उत्पन्न करता है, इसे छोड़ने का संदेश इन दोनों महापुरुषों ने मानवता को दिया।”

डॉ. सुचित्रा कराड-नागरे ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए “जय जवान, जय किसान” का नारा दोबारा प्रेरणास्रोत बनता है। भारत विश्व को शांति का मार्ग दिखाने वाला एकमात्र देश रहेगा।

विद्यार्थियों ने भी महात्मा गांधी और लालबहादूर शास्त्री द्वारा सत्य, अहिंसा, शांति और मानवकल्याण हेतु किए गए कार्यों पर अपने विचार साझा किए। डॉ. रत्नदीप जोशी ने स्वागत भाषण किया, डॉ. मिलिंद पात्रे ने कार्यक्रम का सूत्रसंचालन किया, और डॉ. महेश थोरवे ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

 

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