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स्थानीय स्वशासन संस्था आम चुनाव

स्थानीय स्वशासन संस्था आम चुनाव

 

लेख श्रृंखला – भाग 1

 

मीडिया प्रमाणीकरण एवं नियंत्रण समिति : निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला

पुणे विशाल समाचार

राज्यभर में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के आम चुनावों की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। नगर परिषद और नगर पंचायतों के चुनाव घोषित कर दिए गए हैं। इन चुनावों को निर्भय, निष्पक्ष और पारदर्शी वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार मीडिया प्रमाणीकरण एवं नियंत्रण समितियाँ (Media Certification and Monitoring Committee – MCMC) कार्यरत हैं।

 

इन समितियों का कार्य प्रस्तावित विज्ञापनों का पूर्व प्रमाणीकरण, “पेड न्यूज़” से संबंधित शिकायतों की जांच और निस्तारण, मीडिया में चुनाव कवरेज के मानकों की निगरानी तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री पर नियंत्रण रखना है। राज्य, महानगरपालिका और जिला स्तर पर ऐसी समितियाँ गठित की गई हैं।

 

 

 

जिलास्तरीय मीडिया प्रमाणीकरण और नियंत्रण समिति

 

नगर परिषद, नगर पंचायत, जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत चुनावों से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में प्रसारित किए जाने वाले विज्ञापनों का पूर्व प्रमाणीकरण करने, पेड न्यूज़ की शिकायतों की जांच करने और सोशल मीडिया पर निगरानी रखने का दायित्व इस समिति का होता है।

 

इस समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी करते हैं, जबकि पुलिस अधीक्षक या उनके प्रतिनिधि, अपर जिलाधिकारी या उपजिलाधिकारी स्तर के अधिकारी, संबंधित निर्वाचन अधिकारी, तहसीलदार या नगर परिषद/नगर पंचायत के मुख्याधिकारी इसके सदस्य होते हैं। जिला सूचना अधिकारी इस समिति के सदस्य-सचिव के रूप में कार्य करते हैं।

 

 

 

विज्ञापनों का पूर्व प्रमाणीकरण आवश्यक

 

स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के चुनावों से संबंधित सभी इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में प्रसारित या प्रकाशित किए जाने वाले विज्ञापनों का पूर्व प्रमाणीकरण अनिवार्य है।

 

संविधान, कानूनों या आचारसंहिता का उल्लंघन करने वाले, धर्म, जाति, भाषा, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव या वैमनस्य फैलाने वाले, न्यायालय अथवा व्यक्तियों की मानहानि करने वाले, हिंसा को प्रोत्साहन देने वाले या राष्ट्र की एकता और अखंडता को बाधित करने वाले विज्ञापनों को स्वीकृति नहीं दी जाएगी।

 

पूर्व प्रमाणीकरण के बिना ऐसे किसी भी विज्ञापन का प्रसारण या प्रकाशन वर्जित है। संबंधित विज्ञापन का व्यय उस राजनीतिक दल या उम्मीदवार के चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा।

 

 

 

सोशल मीडिया पर प्रचार के दिशा-निर्देश

 

किसी व्यक्ति या मतदाता को अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट से राजनीतिक मत व्यक्त करने की स्वतंत्रता है, परंतु इससे कानून-व्यवस्था भंग होना, मानहानि या आचारसंहिता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

चुनावी आचारसंहिता लागू होने के बाद किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के पक्ष में बिना लिखित अनुमति के प्रचार नहीं किया जा सकता। ऐसी किसी भी विज्ञापन या पोस्ट के लिए पूर्व प्रमाणीकरण आवश्यक होगा।

 

 

 

विज्ञापन प्रमाणीकरण हेतु आवेदन प्रक्रिया

 

प्रस्तावित विज्ञापन के पूर्व प्रमाणीकरण हेतु निर्धारित प्रारूप (परिशिष्ट-4) में आवेदन जिला सूचना कार्यालय, पुणे में संचालित जिला मीडिया प्रमाणीकरण एवं नियंत्रण समिति को प्रस्तुत करना होगा।

 

विज्ञापन प्रकाशित या प्रसारित करने से कम से कम 5 कार्य दिवस पूर्व आवेदन जमा करना अनिवार्य है। आवेदन के साथ इलेक्ट्रॉनिक प्रति, हस्ताक्षरित विज्ञापन स्क्रिप्ट की दो मुद्रित प्रतियाँ, और भुगतान विवरण संलग्न करना होगा। सभी भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से किए जा सकते हैं।

 

 

 

बहुभाषी विज्ञापनों के लिए विशेष प्रावधान

 

मराठी, हिंदी और अंग्रेज़ी के अलावा किसी अन्य भाषा में बने विज्ञापन के लिए आवेदन करते समय उस विज्ञापन की प्रमाणित अनुवाद प्रति मराठी या अंग्रेज़ी में प्रस्तुत करना आवश्यक है। समिति केवल उन्हीं विज्ञापनों को स्वीकृति प्रदान करेगी जो पूरी तरह नियमों के अनुरूप होंगे।

 

 

 

पेड न्यूज़ पर कड़ी निगरानी

 

चुनाव प्रक्रिया के दौरान यदि किसी समाचार या लेख में किसी उम्मीदवार या दल के पक्ष में प्रचार अथवा विरोध स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है और वह समाचार विज्ञापन के रूप में घोषित नहीं किया गया है, तो उसे “पेड न्यूज़” माना जाएगा।

 

ऐसे मामलों में जिला मीडिया प्रमाणीकरण और नियंत्रण समिति स्वतः संज्ञान लेकर जांच कर सकती है। दोषी पाए जाने पर संबंधित उम्मीदवार या संस्था के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी तथा उसका व्यय चुनाव खर्च में जोड़ा जाएगा।

 

 

 

निर्वाचन आयोग का उद्देश्य

 

राज्य निर्वाचन आयोग का उद्देश्य मीडिया और जनसंचार के माध्यम से मतदाताओं को निष्पक्ष सूचना प्रदान करना, किसी भी प्रकार के दुष्प्रचार को रोकना और सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।

 

मतदाताओं से भी अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली अपुष्ट जानकारी या अफवाहों पर विश्वास न करें, बल्कि केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त समाचारों पर भरोसा करें

(क्रमशः…)

— विशेष लेख, विशाल समाचार

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