पूणे

त्रिभाषा नीति निर्धारण समिति का शिक्षा क्षेत्र सहित विभिन्न घटकों से संवाद

त्रिभाषा नीति निर्धारण समिति का शिक्षा क्षेत्र सहित विभिन्न घटकों से संवाद

 

विशाल समाचार, पुणे 

 

राज्य के विद्यालयों में त्रिभाषा नीति (Three Language Formula) तय करने के उद्देश्य से गठित समिति ने गुरुवार को विधान भवन में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, संस्थाओं के प्रतिनिधियों, भाषाविदों, विचारकों, जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों एवं नागरिकों के साथ संवाद किया। समिति का नेतृत्व शिक्षाविद् डॉ. नरेंद्र जाधव कर रहे हैं।

 

यह समिति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप राज्य के विद्यालयों में त्रिभाषा सूत्र लागू करने की रूपरेखा तैयार कर रही है। इस उद्देश्य से समिति राज्यभर में विभागवार बैठकें कर रही है। इसी क्रम में पुणे में यह जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

 

इस अवसर पर सांसद मेधा कुलकर्णी, विधायक बापूसाहेब पठारे, विभागीय आयुक्त डॉ. चंद्रकांत पुलकुंडवार, समिति सदस्य एवं शिक्षाविद् डॉ. अपर्णा मॉरिस, डॉ. सोनल कुलकर्णी जोशी (डेक्कन कॉलेज), बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. भूषण शुक्ल, अतिरिक्त आयुक्त तुषार ठोंबरे, उपसंचालक संजय डोर्लीकर, तथा शिक्षण उपसंचालक डॉ. गणपत मोरे उपस्थित रहे।

 

डॉ. नरेंद्र जाधव का वक्तव्य

डॉ. जाधव ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन के लिए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ माशेलकर की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था, जिसने वर्ष 2021 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उस रिपोर्ट में त्रिभाषा सूत्र को लागू करने की अनुशंसा की गई थी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अब यह तय करने के लिए समिति गठित की है कि यह नीति किस कक्षा से और किस रूप में लागू की जाए। समिति विभिन्न जिलों में जाकर जनमत और सुझाव एकत्रित कर रही है। प्राप्त सुझावों पर विचार कर दिसंबर 2025 के अंत तक राज्य सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

डॉ. जाधव ने यह भी बताया कि समिति ने https://tribhashasamiti.mahait.org नामक वेबसाइट विकसित की है, जिस पर नागरिक और संस्थान अपने सुझाव एवं प्रश्नावली भरकर जमा कर सकते हैं।

प्रतिनिधियों के विचार

इस अवसर पर सांसद मेधा कुलकर्णी, विधायक बापूसाहेब पठारे एवं विभागीय आयुक्त डॉ. पुलकुंडवार ने भी अपने विचार रखे।

 

कार्यक्रम में मराठी भाषा से संबद्ध शासकीय एवं अशासकीय शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, शिक्षक संघों के पदाधिकारी, प्राचार्य, अध्यापक तथा नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। उपस्थित जनों ने त्रिभाषा नीति के साथ-साथ कंप्यूटर शिक्षा, मूल्य शिक्षा एवं अन्य पाठ्यक्रमों के समन्वित क्रियान्वयन से संबंधित सुझाव भी दिए।

 

 

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