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गंभीर एनिमिक हर गर्भवती महिला का उचित उपचार प्रबंधन करें – कलेक्टर

गंभीर एनिमिक हर गर्भवती महिला का उचित उपचार प्रबंधन करें – कलेक्टर

पोर्टल में तथ्यहीन डाटा दर्ज करने वाले के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करें – कलेक्टर

रिपोर्ट विशाल समाचार संवाददाता 

स्थान: रीवा, मध्य प्रदेश

दिनांक: 04 फरवरी 2026.

रीवा कलेक्ट्रेट के मोहन सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति तथा जिला पोषण समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने कहा कि स्वास्थ्य सूचकांकों को बेहतर करने, कुपोषण पर नियंत्रण तथा महिलाओं एवं शिशुओं की स्वास्थ्य रक्षा के लिए समन्वित प्रयास करें। स्वास्थ्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी जिला, विकासखण्ड एवं ग्राम स्तर तक समन्वय से प्रयास करें। कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कान्फ्रेंस के एजेण्डा बिन्दुओं में तत्परता से कार्यवाही करें। गर्भवती हर महिला का समय पर पंजीयन कराकर नियमित जाँच कराएं। गंभीर एनिमिक महिला को समय पर आयरन सुक्रोज तथा आवश्यकता होने पर खून चढ़ाने की व्यवस्था करें। इनकी जाँच तथा उपचार से संबंधित डाटा पोर्टल पर सही तथ्यों के साथ फीड करें। पोर्टल में तथ्यहीन डाटा दर्ज करने वाले कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करें। अगले महीने यदि डाटा फीडिंग में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित बीएमओ, मेडिकल आफीसर तथा सीएचओ पर भी कार्रवाई की जाएगी। बीएमओ पोर्टल पर दर्ज डाटा का सेक्टरवार विश्लेषण करें। डाटा फीडिंग में जो एएनएम और आशा कार्यकर्ता लापरवाही बरत रही है उस पर सीएमएचओ कड़ी कार्रवाई करें।

 

कलेक्टर ने कहा कि सिरमौर, जवा तथा त्योंथर में गर्भवती महिलाओं का पंजीयन एवं उपचार प्रबंधन दोनों की स्थिति ठीक नहीं है। इसमें सुधार करें। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सोमवार तक सभी विकासखण्डों में प्रशिक्षण शिविर लगाकर एएनएम तथा आशा कार्यकर्ताओं को विभागीय कार्यों एवं डाटा फीडिंग की जानकारी दें। मेडिकल कालेज तथा निजी अस्पतालों में भर्ती होने वाली गर्भवती महिलाओं का भी डाटा पोर्टल में फीड कराएं। जिला अस्पताल के एसएनसीयू में बेड खाली रहते हैं। विकासखण्डों से गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को जिला चिकित्सालय रेफर करें। उन्हें सीधे मेडिकल कालेज रेफर न करें। सिविल सर्जन बेडों की उपलब्धता के अनुसार समन्वय बनाकर शिशुओं को भर्ती कराएं। पोषण पुनर्वास केन्द्र के सभी बेडों में कुपोषित बच्चों को भर्ती कराएं। जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास प्रत्येक परियोजना अधिकारी और पर्यवेक्षक को इस संबंध में सचेत करें। पोषण पुनर्वास केन्द्र से डिस्चार्ज होने के बाद बच्चों का पूरा फॉलोअप करें।

कलेक्टर ने कहा कि जिला क्षय अधिकारी अभियान चलाकर सभी क्षय रोगियों को चिन्हित करें। उन्हें नि:शुल्क दवा के साथ फूड बास्केट उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें। शिशुओं के सम्पूर्ण टीकाकरण में लक्ष्य के अनुसार जो अन्तर है उसे फरवरी माह के अंत तक पूरा कराएं। इसके लिए टीकाकरण के स्पेशल सेशन भी जनरेट करें। यूविन पोर्टल में टीकाकरण की जानकारी समय पर दर्ज कराएं। आयुष्मान कार्ड के लिए शेष बचे पात्र हितग्राहियों को अभियान चलाकर 15 दिवस में सभी का कार्ड बनाएं। इसके लिए शिक्षा विभाग, जनजातीय कार्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग का सहयोग लें। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्रों में दर्ज बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने तथा पोषण आहार के वितरण की कड़ी निगरानी करें। पोषण ट्रैकर में 21 दिन से कम उपस्थिति होने पर कड़ी कार्रवाई करें। बैठक में कलेक्टर ने मातृ वंदना योजना, गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण तथा कुपोषण पर नियंत्रण के संबंध में निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि शिशु अथवा गर्भवती महिला की प्रसव के दौरान मौत होने पर पूरे प्रकरण की 13 दिन में जांच करके प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। हर प्रकरण की ऑडिट अनिवार्य रूप से करें। बैठक में दो प्रकरणों की ऑडिट की गई।

 

बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यत्नेश त्रिपाठी ने बताया कि पोर्टल में डाटा एन्ट्री में लापरवाही बरतने वाली तीन एएनएम को निलंबित किया गया है तथा 5 के वेतन काटने की कार्यवाही की गई है। टीवी मुक्त भारत अभियान के तहत 4 लाख 69 हजार व्यक्तियों की जाँच की गई है। आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए लगातार शिविर लगाए जा रहे हैं। निजी अस्पतालों तथा मेडिकल कालेज में भर्ती होने वाली गर्भवती महिलाओं का डाटा भी एक फरवरी से फीड किया जा रहा है। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास नयन सिंह, सिविल सर्जन डॉ. प्रतिभा मिश्रा, डॉ. अनुराग शर्मा, डॉ. केबी गौतम, डॉ. चौधरी, डॉ. नरेश बजाज तथा सभी बीएमओ एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी उपस्थित रहे।

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