
इटावा को 2026 तक बाल श्रम मुक्त बनाने का संकल्प, सीडीओ की अध्यक्षता में कार्यशाला आयोजित
रिपोर्ट: विशाल समाचार संवाददाता
स्थान: इटावा,उत्तर प्रदेश में
इटावा। जनपद इटावा को वर्ष 2026 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के उद्देश्य से तैयार कार्ययोजना एवं बाल श्रम उन्मूलन तथा पुनर्वास में विभिन्न स्टेकहोल्डर्स की भूमिका पर विचार-विमर्श हेतु विकास भवन स्थित ऑडिटोरियम में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार गौतम ने की।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि बच्चों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बाल श्रम से मुक्त कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चे नासमझ होते हैं और उन्हें यह ज्ञात नहीं होता कि वे क्या कर रहे हैं, इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने परिवार एवं आसपास से बाल श्रम समाप्त करने की शुरुआत करे। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनपद को वर्ष 2026 तक पूर्णतः बाल श्रम मुक्त बनाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि 14 वर्ष तक के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना पूर्णतः प्रतिबंधित है। 14 से 18 वर्ष के किशोर/किशोरियों से कार्य लिया जा सकता है, लेकिन उन्हें खतरनाक व्यवसायों में कार्य पर लगाना प्रतिबंधित है। श्रम की अधिकतम अवधि 6 घंटे निर्धारित है, जिसमें 1 घंटे का विश्राम अनिवार्य है। साथ ही शाम 7 बजे के बाद एवं प्रातः 8 बजे से पहले कार्य नहीं कराया जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किशोर/किशोरियों की आयु सत्यापन के लिए आधार कार्ड मान्य नहीं होगा, बल्कि विद्यालय की टीसी एवं नगर निगम का प्रमाण पत्र ही मान्य होगा। 14 वर्ष तक के बच्चों को श्रम से मुक्त कराकर विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाएगा, जबकि 14 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए जनपद में तकनीकी पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाने पर जोर दिया गया, ताकि वे कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
कार्यशाला में नगर पालिका परिषद जसवंतनगर के श्याम बचन सरोज, सहायक श्रमायुक्त सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

