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जमीन कब्जाने पर पुलिस और प्रशासन मेहरबान?

जमीन कब्जाने पर पुलिस और प्रशासन मेहरबान?

पीड़ितों का प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप

रिपोर्ट :विशाल समाचार

स्थान: पुणे महाराष्ट्र

पुणे: गरीबों के हक की जमीन पर कब्जा किया जा रहा है, फिर भी पुलिस और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। संबंधित जमीन कब्जा मामले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एट्रोसिटी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके बावजूद संबंधित व्यक्तियों को पुलिस और राजस्व विभाग का सहयोग मिल रहा है, ऐसा गंभीर आरोप पीड़ितों ने पत्रकार परिषद में लगाया।

 

पिंपरी चिंचवड़ के वडमुखवाड़ी, चऱ्होली इलाके  में गट नंबर ,गट नंबर 175/1/1 (फेरफार क्रमांक 324, 327, 328, 329, 456, 457, 637, 638, 639, 640, 641, 642, 643, 644 आदि) कुल लगभग 3 एकड़ 20 गुंठा जमीन मूल रूप से कोंडिबा कृष्णा गिलबिले, भीमराव पांडुरंग गिलबिले, कुलधुराज ज्ञानेश्वर कोंडिबा गिलबिले आदि के नाम दर्ज है। यह जमीन हजारों रुपये प्रति गुंठा के हिसाब से बेची गई थी। लगभग 40 से 50 खरीदार सामान्य परिस्थितियों से जुड़े हैं।

एक खरीदार के पुत्र दिनेश गुमे ने बताया कि कई वर्षों से इस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। हमें शिकायत करने के बावजूद कोई न्याय नहीं मिल रहा। हमारी जमीन पर जबरन कब्जा कर रास्ता बनाया गया है। पिछले कुछ दिनों से जमीन के चारों ओर सीमेंट की दीवार (फेंसिंग) खड़ी कर दी गई है और खुदाई कर मलबा डाला गया है। ओंकारेश्वर इंडस्ट्रियल कंपनी ने 1 से 2 गुंठा जमीन फर्जी तरीके से लेने का प्रयास किया है और वहां अवैध निर्माण शुरू कर दिया है।

इस संबंध में मालिक दीपक धुमे ने दिवानी न्यायालय में केस दायर किया है (केस नंबर 8/2022), जो वर्तमान में लंबित है। उन्होंने कहा कि हमारी जमीन पर जबरन कब्जा कर अवैध उपयोग किया जा रहा है। प्रक्रिया लंबित होने के बावजूद दहशत फैलाकर जमीन हड़पी जा रही है।

चिखली पुलिस स्टेशन (पिंपरी चिंचवड़) में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। 2/12/2024 को शिकायत के बावजूद फिर से जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई। इसके बाद जमीन का समतलीकरण भी किया गया। इस मामले में हम असहाय हैं।

पीड़ितों ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय की 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन पर भी संपर्क किया गया, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हमारी मांग है कि संबंधित आरोपियों पर सख्त आपराधिक कार्रवाई की जाए, उन्हें प्रतिबंधित किया जाए और हमारी जमीन हमें वापस दिलाई जाए।

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