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नेट जीरो से आगे का सफर: 2026 के ट्रांजिशन के लिए कॉर्पोरेट रणनीति

नेट जीरो से आगे का सफर: 2026 के ट्रांजिशन के लिए कॉर्पोरेट रणनीति

रामनाथ वैद्यनाथन, एवीपी और हेड – एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी, गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान:महाराष्ट्र,राज्य 

पिछले एक साल में, बड़े संगठनों को अपनी ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) प्रतिबद्धताओं से पीछे हटते देखा गया है। इसमें वे कंपनियां शामिल हैं, जिन्होंने जलवायु, प्लास्टिक पैकेजिंग और DEI (विविधता, समानता और समावेश) के अपने वादों को वापस ले लिया है। वैश्विक आर्थिक मंदी एक महत्वपूर्ण कारक रही है, जिससे कॉर्पोरेट जगत अब स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) में निवेश से मिलने वाले रिटर्न को अधिक बारीकी से देख रहा है।

सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों से पीछे हटने का एक कारण तेजी से जटिल होते रिपोर्टिंग नियम भी हैं, जो एक ऐसा मानक बना रहे हैं, जहां अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्रोत्साहित नहीं किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, Scope 3 उत्सर्जन के लिए, कठिन समय सीमा के भीतर विशाल आपूर्ति श्रृंखलाओं (सप्लाई चेन) से विश्वसनीय ESG डेटा प्राप्त करना लगभग असंभव है। क्या व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए डेटा की इतनी सूक्ष्मता वास्तव में आवश्यक है?

इसे पहचानते हुए, नियामकों ने ESG रिपोर्टिंग को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए कदम उठाए हैं। भारत के बाजार नियामक, SEBI ने नई BRSR कोर वैल्यू-चेन ESG डिस्क्लोजर को एक साल के लिए टाल दिया है, इसे 2026 तक स्वैच्छिक बना दिया है और इसका दायरा उन प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं तक सीमित कर दिया है, जो खर्च का 75 प्रतिशत कवर करते हैं। इसी तरह, यूरोपीय संघ (EU) ने छोटी कंपनियों के लिए रिपोर्टिंग नियमों को लागू करने की अवधि टाल दी और आवश्यक डेटा बिंदुओं की संख्या कम कर दी।

हमने मध्य यूरोप में विनाशकारी बाढ़ और बोलीविया में भीषण जंगलों की आग देखी है। ये आपदाएं अर्थव्यवस्थाओं को झकझोर देती हैं और जीवन बदल देती हैं। यह स्पष्ट है कि व्यवसाय अब केवल उत्सर्जन कम करने पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकते। उन्हें उस स्थिति के लिए तैयार रहना होगा जो पहले से ही यहां मौजूद है। अधिकतर कंपनियां अब अपने जोखिमों को विभाजित कर रही हैं और उन रणनीतियों में पैसा लगा रही हैं, जो उन्हें इन चुनौतियों का सामना करने में मदद करती हैं। अनुकूलन (Adaptation) अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि एक नई वास्तविकता है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुमानों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा प्रकृति पर निर्भर है। जैव विविधता (Biodiversity) और प्रकृति की हानि वैश्विक जलवायु चर्चाओं का हिस्सा बनी हुई है। अधिकतर कंपनियां अब यह आकलन कर रही हैं कि उनका काम जैव विविधता को कैसे प्रभावित करता है। टास्कफोर्स ऑन नेचर-रिलेटेड फाइनेंशियल डिस्क्लोजर (TNFD) ने जैव विविधता के नुकसान पर नज़र रखने और नुकसान को कम करने के तरीके खोजने के लिए मानक (metrics) तैयार किए हैं।

‘ग्रीन दावों’ (green claims) पर सख्त नियमों के बावजूद, कुछ कंपनियाँ खुद को वास्तव में जितना वे हैं, उससे कहीं अधिक टिकाऊ दिखाने की कोशिश करेंगी। इस तरह की ‘ग्रीनवाशिंग’ लोगों में अविश्वास पैदा करती है और वास्तविक प्रगति की गति को धीमा कर देती है। इसे रोकने के लिए, सस्टेनेबिलिटी, कानूनी, अनुपालन (compliance) और ऑडिट टीमें यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगी कि डेटा सही और प्रमाणित हो।

जैसे-जैसे नियम बढ़ेंगे, कानूनी और वित्त विभागों में सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी भूमिकाएं बढ़ने की संभावना है। कंपनियों के जनरल काउंसल और सीएफओ (CFO) अब सस्टेनेबिलिटी पहलों और रिपोर्टिंग में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। ‘ESG कंट्रोलर’ जैसे पद और अधिक सामान्य हो सकते हैं, जो सस्टेनेबिलिटी प्रकटीकरण (disclosures) की प्रणालियों और प्रक्रियाओं की निगरानी करेंगे।

हालांकि कुछ कंपनियों ने आर्थिक या व्यावहारिक बाधाओं के कारण सस्टेनेबिलिटी पर अपने कदम पीछे खींचे हैं, लेकिन वे उन चीजों पर दोगुना जोर दे रही हैं, जो उनके मुनाफे (bottom line) को प्रभावित करती हैं। प्रतिबद्धताएं अब अधिक स्पष्ट हैं; जैव विविधता और जलवायु जोखिम अब बिजनेस प्लान का हिस्सा बन रहे हैं। कॉर्पोरेट सस्टेनेबिलिटी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। हो सकता है कि कदम कम उठाए जा रहे हों, लेकिन वे अधिक प्रभावशाली हैं। जो कंपनियां इस बदलाव को कुशलता से संभालेंगी, वे भविष्य की चुनौतियों के लिए और भी मजबूत होकर उभरेंगी।

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