
आरक्षण की लड़ाई को बड़ी सफलता: 33 हजार आपत्तियां पार, पुणे में 26 अप्रैल को संयुक्त गोलमेज सम्मेलन
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे,महाराष्ट्र
पुणे: महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रस्तावित अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण के उपवर्गीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन को बड़ा जनसमर्थन मिल रहा है। ‘महाराष्ट्र अनुसूचित जाति आरक्षण उपवर्गीकरण पुनर्विलोकन समिति’ (पद्मपाणी फाउंडेशन) सहित विभिन्न राजनीतिक दलों, संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के प्रयासों से अब तक प्रशासन को 33,000 से अधिक आपत्तियां ईमेल के माध्यम से प्राप्त हो चुकी हैं। इसे समाज में बढ़ती जागरूकता और असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
इसी क्रम में समिति के अध्यक्ष राहुल डंबाले के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पुणे स्थित बार्टी (BARTI) कार्यालय में निबंधक से मुलाकात कर विस्तृत चर्चा की। बैठक में दो महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए।
पहला, उपवर्गीकरण के विरोध में भेजी गई प्रत्येक आपत्ति को प्रशासन द्वारा आधिकारिक पावती (Acknowledgment) देने का आश्वासन दिया गया। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आने की उम्मीद जताई गई है।
दूसरा, न्यायमूर्ति अनंत बदर समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए। आरोप लगाया गया कि समिति ने रिपोर्ट तैयार करते समय पारदर्शिता नहीं रखी और जनभावनाओं की अनदेखी की। पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखे जाने पर भी नाराजगी जताई गई।
राहुल डंबाले ने कहा, “33 हजार आपत्तियों को केवल तकनीकी मामला न समझा जाए, बल्कि इसके पीछे की सामाजिक भावनाओं और कानूनी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। बिना ठोस आंकड़ों और पारदर्शिता के किया गया उपवर्गीकरण समाज में विभाजन पैदा कर सकता है।”
आंदोलन को आगे बढ़ाने और कानूनी रणनीति तय करने के लिए 26 अप्रैल 2026 को पुणे में ‘संयुक्त गोलमेज सम्मेलन’ आयोजित किया गया है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे और आगे की दिशा तय की जाएगी।
डंबाले ने स्पष्ट किया कि “आरक्षण के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए यह संघर्ष 33 हजार आपत्तियों पर नहीं रुकेगा, बल्कि इसे और तेज किया जाएगा।”



