‘एल नीनो’ की पृष्ठभूमि में पशुसंवर्धन विभाग सतर्क — डॉ. किरण पाटिल
पशुधन की सुरक्षा हेतु योजना एवं कार्यान्वयन के दिशा-निर्देश जारी
रिपोर्ट :विशाल समाचार
स्थान: पुणे महाराष्ट्र
पुणे, : राज्य में बढ़ते तापमान और संभावित हीटवेव (उष्णलहर) के खतरे को ध्यान में रखते हुए पशुसंवर्धन विभाग ने पशुपालकों एवं पोल्ट्री व्यवसायियों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बढ़ती गर्मी का पशुधन पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए विभाग ने सभी पशु चिकित्सा संस्थाओं को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं तथा पशुपालकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
उष्णलहर के दौरान पशुधन की देखभाल के लिए क्षेत्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने हेतु विभाग ने अधीनस्थ अधिकारियों को मार्गदर्शक सूचनाएं भेजी हैं। पशुपालकों को स्वच्छ एवं ठंडा पीने का पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराने, आहार में खनिज मिश्रण एवं विटामिन शामिल करने तथा दुधारू पशुओं को संतुलित आहार देने की सलाह दी गई है।
खेती या परिवहन कार्य में उपयोग होने वाले पशुओं को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक आराम देने, उन्हें छायादार एवं हवादार स्थान पर रखने तथा गोठों (शेड) को तापरोधी बनाने की सलाह दी गई है। छत पर घास या पत्तों का आवरण डालकर पानी का छिड़काव करने और आवश्यकता अनुसार स्प्रिंकलर का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, घटसर्प, फऱ्या और आंत्रविष जैसे रोगों के विरुद्ध समय पर टीकाकरण और कृमिनाशक दवाओं के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।
तात्कालिक उपाय एवं उपचार:
यदि पशुधन में हीट स्ट्रोक के लक्षण जैसे तेज सांस लेना, लार गिरना या बेचैनी दिखाई दे, तो तुरंत उन्हें छाया या ठंडे स्थान पर ले जाएं और शरीर पर ठंडा पानी डालें। घोड़ों जैसे पशुओं में पैरों से ऊपर की ओर पानी डालना उचित है। आवश्यकता पड़ने पर नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें। विभाग ने सभी अस्पतालों में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं का पर्याप्त भंडार उपलब्ध कराया है तथा मोबाइल पशु चिकित्सा दल तैनात किए गए हैं।
पशुसंवर्धन विभाग ने जिला प्रशासन एवं सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे सड़कों पर रहने वाले पशु-पक्षियों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर पानी की व्यवस्था करें। मृत पशुओं के वैज्ञानिक निस्तारण हेतु सुरक्षित स्थान चिन्हित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
क्या करें: पशुओं के लिए हमेशा स्वच्छ व ठंडे पानी की व्यवस्था रखें। पानी के बर्तनों को नियमित साफ करें और छाया में रखें। चारा एवं पशुखाद्य का पर्याप्त भंडारण करें तथा आहार में मिनरल मिक्सचर शामिल करें। पशुओं को छायादार एवं हवादार स्थान पर रखें। गर्मी से बचाव हेतु पानी का छिड़काव करें और आधुनिक शेड में स्प्रिंकलर का उपयोग करें।
क्या न करें: पशुधन को खुले धूप में न बांधें। उन्हें बंद गाड़ियों में न छोड़ें। दोपहर की तेज धूप में काम न कराएं। पशुओं को पानी के लिए लंबी दूरी तय करने पर मजबूर न करें। भीड़भाड़ से बचाएं और गर्मी के समय पशुओं का परिवहन न करें। मृत पशुओं को खुले में न छोड़ें।
डॉ. किरण पाटिल, आयुक्त पशुसंवर्धन विभाग ने कहा: “एल नीनो की स्थिति में पशुपालकों को विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। चारा प्रबंधन एवं पशुओं के स्वास्थ्य संबंधी किसी भी सहायता के लिए नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें। साथ ही ‘1962 कॉल सेंटर’ के माध्यम से भी मार्गदर्शन एवं सेवाएं उपलब्ध हैं।”
