
जुलाई से महाराष्ट्र में लागू होगा ‘लैंड टाइटलिंग एक्ट’
ऐसा कानून लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा महाराष्ट्र — राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे
एआई नीति के तहत राज्य सरकार ने किए 1500 करोड़ रुपये के निवेश समझौते
रिपोर्ट: विशाल समाचार
स्थान:पुणे महाराष्ट्र
पुणे, महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने घोषणा की है कि राज्य में आगामी जुलाई महीने से ‘लैंड टाइटलिंग एक्ट’ लागू किया जाएगा। इस कानून के लागू होने के बाद महाराष्ट्र ऐसा कानून लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से राज्य के नागरिकों की संपत्ति को कानूनी रूप से सुनिश्चित प्रॉपर्टी का दर्जा मिलेगा और भविष्य में दुनिया के किसी भी देश में उसे आर्थिक संपत्ति के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।
वे पुणे में भारती विद्यापीठ के 62वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे, विधायक भीमराव तापकीर, भारती विद्यापीठ के कार्यवाह विधायक डॉ. विश्वजीत कदम, कुलपति डॉ. शिवाजीराव कदम, वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई तथा कुलगुरु डॉ. विवेक साळवी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
राजस्व मंत्री बावनकुळे ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. पतंगराव कदम द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किया गया कार्य महाराष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने छोटे स्तर से शुरू होकर भारती विद्यापीठ को वैश्विक पहचान दिलाई। उनके विचार आज देश-विदेश तक पहुंच चुके हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना शिक्षा के बिना पूरा नहीं हो सकता। राज्य सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नीति के अंतर्गत 1500 करोड़ रुपये के निवेश समझौते किए हैं तथा डेढ़ लाख विद्यार्थियों को एआई तकनीक का प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आने वाले समय में विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के लिए नई तकनीक और एआई को अपनाना अत्यंत आवश्यक होगा।
उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को अब शैक्षणिक दस्तावेजों के लिए स्टांप पेपर की आवश्यकता नहीं होगी और विभिन्न प्रमाणपत्र निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ‘छत्रपति शिवाजी महाराज महसूल अभियान’ के तहत राज्य के 30 लाख विद्यार्थियों तक आवश्यक दस्तावेज मुफ्त पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने कहा कि शिक्षा ही समाज और व्यक्ति की प्रगति का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके साथ ही विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का विकास भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एआई शिक्षा, सैनिक प्रशिक्षण, छात्राओं के लिए सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण, शिक्षकों के प्रशिक्षण तथा स्कूलों में स्वच्छ पेयजल एवं शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान दे रही है। मराठी भाषा के संरक्षण के लिए केवल भावनाएं व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठोस कार्य करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में भारती विद्यापीठ के कार्यवाह डॉ. विश्वजीत कदम ने संस्था की 62 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा और सामाजिक योगदान की जानकारी दी। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई को ‘डॉ. पतंगराव कदम स्मृति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। साथ ही विद्यापीठ के शोधकर्ताओं, प्राध्यापकों और कर्मचारियों का भी विशेष सम्मान किया गया।



