
बारिश से पहले बाढ़ नियंत्रण के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग
राज्यसभा सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने प्रशासन से मांगा स्पष्ट रोडमैप
पुणे: बारिश का मौसम शुरू होने से पहले पुणे शहर में बाढ़ नियंत्रण को लेकर प्रशासन ने अब तक क्या तैयारी की है, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए। राज्यसभा सांसद प्रो. डॉ. मेधा कुलकर्णी ने कहा कि मुळा-मुठा नदी सुधार परियोजना के तहत चल रहे कार्यों के कारण नदी की जल वहन क्षमता कम हो रही है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने मांग की कि इस परियोजना से अधिकृत सोसायटियों और मकानों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे, इसके लिए प्रशासन विशेष सावधानी बरते।
शुक्रवार को आयोजित पुणे जिला नियोजन समिति की बैठक में सांसद कुलकर्णी ने शहर और जिले से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि नदी पात्र में किए जा रहे भराव कार्यों के कारण बारिश के दौरान पानी के आवासीय क्षेत्रों और सोसायटियों में घुसने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में हर वर्ष बाढ़ प्रभावित होने वाली बस्तियों के लिए प्रशासन को ठोस कार्ययोजना घोषित करनी चाहिए।
नसरापूर की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने जिले के स्कूलों, सार्वजनिक स्थलों, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए विशेष निधि उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी की मदद से आरोपियों तक पहुंचना आसान हुआ है, इसलिए महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए यह व्यवस्था प्रभावी साबित हो सकती है।
उन्होंने स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए शौचालय, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए अधिक निधि देने की आवश्यकता बताई। साथ ही ‘जेंडर बजट’ के अंतर्गत महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा संबंधी योजनाओं को और मजबूत करने की मांग भी की।
सांसद कुलकर्णी ने पुणे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दरगाहों, मजारों तथा अन्य धार्मिक अतिक्रमणों और वक्फ रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की।
बैठक में उन्होंने जिले के UNESCO विश्व धरोहर स्थलों, किलों और ऐतिहासिक इमारतों पर हो रहे अतिक्रमण रोकने तथा वहां आवश्यक सुविधाएं, मरम्मत और विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त निधि उपलब्ध कराने की भी मांग की।
इसके अलावा शहर और आसपास की पहाड़ियों को काटने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए उन्होंने अवैध उत्खनन, अवैध निर्माण और पर्यावरणीय नुकसान रोकने के लिए प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की।



