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चित्रकला और शिल्पकला देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत : विवेक खटावकर

चित्रकला और शिल्पकला देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत : विवेक खटावकर

विद्यार्थी सहायक समिति में कला दीर्घा का उद्घाटन, कलाकार पूर्व छात्रों का सम्मेलन आयोजित

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: पुणे महाराष्ट्र 

पुणे। वरिष्ठ शिल्पकार विवेक खटावकर ने कहा कि चित्रकला और शिल्पकला भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक हैं तथा देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। कल्पनाशक्ति, एकाग्रता, संयम और समर्पण कलाकार को और अधिक समृद्ध बनाते हैं।

 

वे विद्यार्थी सहायक समिति के शिवाजी हाउसिंग सोसायटी स्थित लाजपतराय विद्यार्थी संकुल में नवस्थापित कला दीर्घा के उद्घाटन एवं कलाकार पूर्व छात्र सम्मेलन में बोल रहे थे। इस अवसर पर वरिष्ठ चित्रकार मिलिंद मुळीक, समिति के अध्यक्ष पद्मश्री प्रतापराव पवार, कार्यकारी विश्वस्त तुषार रंजनकर, विश्वस्त तुकाराम गायकवाड़, चित्रकार अश्विनी पवार, हेमंत राजहंस, प्रज्ञा सातारकर, प्रभाकर पाटील, गणेश काळे, मनीषा गोसावी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

 

कार्यक्रम के अंतर्गत समिति में रहकर कला शिक्षा प्राप्त करने वाले पूर्व छात्रों की कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसे दर्शकों का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला। यह प्रदर्शनी रविवार शाम 8 बजे तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी। साथ ही रविवार शाम 5.30 बजे चित्रकार विलास कुलकर्णी द्वारा जलरंग चित्रकला का लाइव प्रदर्शन भी किया जाएगा।

 

विवेक खटावकर ने कहा कि कला केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने वाली सशक्त अभिव्यक्ति है। कला समाज को संवेदनशील बनाती है और नई पीढ़ी तक संस्कार पहुंचाने का कार्य करती है।

 

पद्मश्री प्रतापराव पवार ने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई और करियर के साथ कला, साहित्य, खेल तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों को भी अपनाना चाहिए। इससे व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है। उन्होंने कहा कि कला दीर्घा विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच प्रदान करेगी।

 

चित्रकार मिलिंद मुळीक ने कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की शक्ति भी देती है। कलाकारों की कलाकृतियों को समाज तक पहुंचना चाहिए तथा उन्हें उचित बाजार और आर्थिक मूल्य मिलना चाहिए।

 

कार्यक्रम में अश्विनी पवार ने कला के प्रति अपने अनुभव साझा किए, जबकि हेमंत राजहंस ने कला दीर्घा की संकल्पना पर प्रकाश डाला। प्रभाकर पाटील ने स्वागत एवं प्रास्ताविक किया तथा अनिता देशपांडे ने कार्यक्रम का संचालन किया।

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