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ZEE5 पर 10 जुलाई को रिलीज होगी मराठी फिल्म ‘फ्रेम’, पत्रकारिता के फर्ज़ और इंसानियत के संघर्ष को दिखाएगी कहानी

ZEE5 पर 10 जुलाई को रिलीज होगी मराठी फिल्म ‘फ्रेम’, पत्रकारिता के फर्ज़ और इंसानियत के संघर्ष को दिखाएगी कहानी

रिपोर्ट: विशाल समाचार 

स्थान:मुंबई, महाराष्ट्र 

मुंबई, । मराठी ZEE5 ने अपनी नई ओरिजिनल फिल्म ‘फ्रेम’ की घोषणा की है। सामाजिक सरोकारों पर आधारित यह दमदार सोशल-ड्रामा 10 जुलाई 2026 को मराठी ZEE5 पर प्रीमियर होगा। फिल्म का लेखन और निर्देशन विक्रम पटवर्धन ने किया है, जबकि इसमें नागराज मंजुले, अमेय वाघ, मुग्धा गोडसे और अक्षया गुरव मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण आटपाट और Zee स्टूडियोज़ ने किया है।

फिल्म की कहानी पुणे के एक अखबार के न्यूज़रूम की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट चंदू पानसरे और युवा पत्रकार सिद्धार्थ देशमुख के माध्यम से पत्रकारिता के पेशेवर दायित्व और मानवीय संवेदनाओं के बीच होने वाले संघर्ष को दिखाया गया है। एक विनाशकारी भूकंप की कवरेज के दौरान दोनों ऐसे नैतिक सवालों से जूझते हैं, जहां कैमरे में तस्वीर कैद करना और पीड़ितों की मदद करना—दोनों के बीच फैसला करना आसान नहीं रह जाता।

फिल्म यह सवाल उठाती है कि किसी त्रासदी को कवर करते समय पत्रकार और फोटो जर्नलिस्ट की जिम्मेदारी केवल खबर दिखाना है या जरूरतमंदों की मदद करना भी। कहानी मीडिया की भूमिका, नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और इंसानियत के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को प्रभावशाली ढंग से सामने लाती है।

ZEE मराठी एवं मराठी ZEE5 की चीफ चैनल ऑफिसर और बिजनेस हेड वी. आर. हेमा ने कहा कि ‘फ्रेम’ एक ऐसी फिल्म है जो काम के फर्ज़ और मानवीय संवेदनाओं के बीच के संघर्ष को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि मराठी ZEE5 दर्शकों तक मजबूत और सार्थक कहानियां पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

फिल्म के निर्देशक विक्रम पटवर्धन ने कहा कि ‘फ्रेम’ केवल कैमरे के नजरिए की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत के नजरिए की भी कहानी है, जो दर्शकों को अपने नैतिक निर्णयों पर सोचने के लिए मजबूर करेगी।

अभिनेता नागराज मंजुले ने अपने किरदार को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि फिल्म दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करेगी कि कठिन परिस्थितियों में सही फैसला क्या होता है। वहीं अमेय वाघ ने कहा कि उनका किरदार आज के युवा पत्रकारों के आदर्शों, संवेदनाओं और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच होने वाले संघर्ष को दर्शाता है।

पत्रकारिता की नैतिक दुविधाओं और मानवीय मूल्यों पर आधारित ‘फ्रेम’ दर्शकों के लिए एक विचारोत्तेजक और भावनात्मक अनुभव साबित होने की उम्मीद है।

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