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वर्षाकाल में जल और मच्छर जनित रोगों से बचने की सलाह 

वर्षाकाल में जल और मच्छर जनित रोगों से बचने की सलाह 

रिपोर्ट :विशाल समाचार 

स्थान: रीवा मध्य प्रदेश 

रीवा . वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही आम जनता को मौसमी बीमारियों से सतर्क रहने और बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। वर्षाकाल में बढ़ती नमी, अनुकूल तापमान और जगह-जगह होने वाले जल-भराव के कारण मच्छरों तथा बैक्टीरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ता है, जिससे कई तरह की गंभीर बीमारियां फैलने की आशंका रहती है। जल-भराव के कारण मलेरिया के साथ-साथ डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाले एडीज मच्छरों की तादाद बढ़ जाती है। डेंगू का मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है। खेतों, तालाबों, गड्डों, टूटे-फूटे डिब्बों, पुराने टायरों, पशुओं के पीने के नाद, कूलर, गमलों और फ्रिज की ट्रे में जमा होने वाला पानी मच्छरों के लार्वा के लिए सबसे मुफीद जगह बन जाता है। इस मौसम में थोड़ी सी सावधानी रखकर इन बीमारियों से पूरी तरह बचा जा सकता है।

 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यत्नेश त्रिपाठी ने बताया कि वर्षाकाल में दूषित जल और भोजन के सेवन से टाइफाइड, पीलिया, डायरिया, पेचिस और हैजा जैसी बीमारियां हो सकती हैं। बच्चों में दूषित खान-पान के कारण उल्टी-दस्त का प्रकोप अधिक गंभीर रूप ले सकता है। इसके अलावा, मानसून के दौरान आंखों का संक्रमण जैसे आई-फ्लू या कंजक्टिवाइटिस भी तेजी से फैलता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों के आसपास सफाई रखें और पानी को लंबे समय तक जमा न रहने दें। कूलर, फूलदान आदि का पानी सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर बदलें। जहां पानी खाली करना संभव न हो, वहां खाद्य तेल, मिट्टी का तेल (केरोसिन) या जला हुआ ऑयल डाल दें, जिससे पानी के ऊपर एक पतली परत बन जाती है और मच्छरों के लार्वा नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही पीने और भोजन पकाने के लिए हमेशा शुद्ध व उबले हुए पानी का ही उपयोग करें। खाने-पीने की चीजों को ढककर रखें, सड़े-गले फलों के सेवन से बचें और हरी सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें। कुछ भी खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोना अनिवार्य बनाएं तथा खुले में शौच न करके अनिवार्य रूप से शौचालय का प्रयोग करें। मच्छरों से सुरक्षित रहने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें, सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और जरूरत पड़ने पर कीटनाशक का छिड़काव करवाएं। आई-फ्लू से बचने के लिए बार-बार आंखों को हाथ न लगाएं, चेहरे को ठंडे पानी से धोएं, धूप के चश्मे का प्रयोग करें और परिवार में सभी के तौलिए व रुमाल अलग रखें।

 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि ठंड लगकर तेज बुखार आना, मांसपेशियों व जोड़ों में असहनीय दर्द, सिरदर्द और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ना डेंगू और मलेरिया के मुख्य लक्षण हैं। ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई देने पर या दस्त की स्थिति होने पर बिना देरी किए तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार खून की जांच कराएं और पूरा उपचार लें। दस्त होने पर ओ.आर.एस. का घोल और जिंक सल्फेट की गोली का सेवन करें। समय पर लिया गया सही उपचार ही इन बीमारियों से पूरी तरह बचाव का एकमात्र जरिया है।

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