
पीबीएमए के एच.वी. देसाई आई हॉस्पिटल में आशा एवं आंगनवाड़ी सेविकाओं के लिए विशेष कार्यक्रम
· ग्रासरूट स्तर पर नेत्र स्वास्थ्य को मजबूत करने का प्रयास
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, : पीबीएमए के एच.वी. देसाई आई हॉस्पिटल में हाल ही में आशा एवं आंगनवाड़ी सेविकाओं के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें 20 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (सीएचओ) के साथ भोर तालुका की 200 आशा एवं आंगनवाड़ी सेविकाएं उपस्थित थीं. यह पहल कृषि सभापति अमोल नलावडे के नेतृत्व में आयोजित की गई. इस अवसर पर अमोल नलावडे के साथ तालुका स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवकर एवं डॉ. तिडके, स्थानीय प्रतिनिधि किरण राऊत, विशाल कोंडे एवं माऊली खुटवड तथा जिला परिषद सदस्य प्रवीण जगदाळे उपस्थित थे.
दिनभर आयोजित इस कार्यक्रम में आशा एवं आंगनवाड़ी सेविकाओं ने एच.वी. देसाई आई हॉस्पिटल के विभिन्न विभागों का दौरा कर उनके कार्यों की जानकारी ली. इसके बाद अस्पताल के शंकरशेठ साबळे सभागृह में उनके लिए अस्पताल की विभिन्न चिकित्सा सेवाओं, आमतौर पर पाए जाने वाले विभिन्न नेत्र रोगों तथा उनके प्राथमिक लक्षणों के बारे में नेत्र विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया गया.
इस अवसर पर पीबीएमए के एच.वी. देसाई आई हॉस्पिटल के कार्यकारी निदेशक परवेज बिलिमोरिया, कार्यकारी चिकित्सा निदेशक (नेटवर्क) डॉ. कुलदीप डोले, यूनिट एवं लेसिक विभाग प्रमुख डॉ. वर्षा पुराणिक, परियोजना निदेशक डॉ. प्रविण नरवाडकर सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे. कार्यक्रम के बाद आशा एवं आंगनवाड़ी सेविकाओं के लिए निःशुल्क नेत्र जांच की गई तथा जरूरतमंदों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए.
आशा एवं आंगनवाड़ी सेविकाएं समुदाय और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होती हैं. विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में उनका परिवारों के साथ नियमित संवाद रहता है. इसलिए स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या की पहचान कर समय पर निदान एवं उपचार उपलब्ध कराने तथा निवारक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता पैदा करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इससे पहले एच.वी. देसाई आई हॉस्पिटल में वेल्हे तालुका की आशा एवं आंगनवाड़ी सेविकाओं के लिए भी इसी प्रकार का कार्यक्रम आयोजित किया गया था.
पीबीएमए के एच.वी. देसाई आई हॉस्पिटल के कार्यकारी चिकित्सा निदेशक (नेटवर्क) डॉ. कुलदीप डोले ने कहा कि विशेष रूप से ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लोगों में नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा नेत्र संबंधी समस्याओं वाले लोगों में लक्षणों की पहचान कर उन्हें समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराने में इस प्रकार के उपक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.


