
नारायण सेवा संस्थान 3डी प्रिंटिंग और मॉड्यूलर तकनीक से 361 दिव्यांगजनों को देगा आत्मनिर्भरता का सहारा
जापानी-जर्मन तकनीक आधारित नारायण मॉड्यूलर आर्टिफिशियल लिम्ब का 23 अगस्त को पुणे में फिटमेंट शिविर
रिपोर्ट विशाल समाचार
स्थान पुणे महाराष्ट्र
पुणे, । कृत्रिम अंगों के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए उदयपुर स्थित नारायण सेवा संस्थान की ओर से 23 अगस्त को पुणे में 3डी प्रिंटेड नारायण मॉड्यूलर आर्टिफिशियल लिम्ब फिटमेंट शिविर आयोजित किया जाएगा। टाटा टेली बिज़नेस सर्विसेज तथा न्यूमैन एंड एस्सार ग्रुप के संयुक्त सहयोग से होने वाले इस शिविर में 361 दिव्यांगजनों को आधुनिक कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरणों का निःशुल्क लाभ मिलेगा। शिविर के साथ भामाशाह सम्मान समारोह भी होगा।
शिविर तिरुपती मंगल कार्यालय, टिंगरे नगर, रोड नंबर 2, विश्रांतवाडी एयरपोर्ट रोड, पुणे में सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगा। उद्घाटन सुबह 11 बजे होगा। इसमें केवल पूर्व चयनित लाभार्थी ही शामिल होंगे।
संस्थान के अनुसार, शिविर में 268 दिव्यांगजनों को 276 नारायण मॉड्यूलर कृत्रिम अंग तथा 60 दिव्यांगजनों को 85 कैलिपर्स का फिटमेंट किया जाएगा। इसके साथ आवश्यक सहायक उपकरण भी प्रदान किए जाएंगे। इन लाभार्थियों का चयन 5 जुलाई को आयोजित निःशुल्क नारायण लिम्ब मेजरमेंट कैंप में किया गया था।
3डी प्रिंटिंग से सटीकता और मॉड्यूलर डिजाइन पर जोर
शिविर की खासियत जापान एवं जर्मन तकनीक आधारित 3डी प्रिंटेड नारायण मॉड्यूलर आर्टिफिशियल लिम्ब होंगे। पारंपरिक कृत्रिम अंगों की तुलना में मॉड्यूलर तकनीक का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसके विभिन्न हिस्सों को आवश्यकता के अनुसार फिटमेंट और समायोजन की प्रक्रिया से उपयोगकर्ता के लिए अधिक अनुकूल बनाया जा सकता है। 3डी आधारित निर्माण तकनीक से अंग की संरचना और फिटमेंट में अपेक्षित सटीकता हासिल करने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञ तकनीकी टीम लाभार्थियों के लिए कृत्रिम अंग का फिटमेंट करने के साथ उसकी पोजिशनिंग, संतुलन, चलने की मुद्रा और उपयोग की सहजता पर भी ध्यान देगी। फिटमेंट के बाद लाभार्थियों को कृत्रिम अंग के उपयोग, संतुलन बनाने और दैनिक गतिविधियों में सुरक्षित एवं सहज तरीके से चलने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल कृत्रिम अंग उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से उपयोग करने का आत्मविश्वास विकसित करना भी है।
आश्रम प्रभारी सुरेंद्र सिंह झाला ने बताया कि संस्थान कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने के साथ उसके सही फिटमेंट और उपयोग को भी समान महत्व देता है। दुर्घटना, बीमारी अथवा जन्मजात दिव्यांगता के कारण चलने-फिरने में कठिनाई झेल रहे लोगों को आधुनिक तकनीक से निर्मित कृत्रिम अंग उपलब्ध कराकर उनकी गतिशीलता और आत्मनिर्भरता बढ़ाना संस्थान के प्रयासों का प्रमुख हिस्सा है।
संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है, जब वह जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन को आसान और आत्मनिर्भर बनाने में काम आए। इसी सोच के साथ पुणे जैसे महानगरों में आधुनिक कृत्रिम अंगों के फिटमेंट शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 3डी प्रिंटिंग और मॉड्यूलर तकनीक के उपयोग से कृत्रिम अंगों को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि शिविर में आने वाले लाभार्थियों एवं उनके परिजनों के लिए निःशुल्क भोजन, बैठने की व्यवस्था तथा प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। शिविर में समाजसेवियों और दानदाताओं का सम्मान भी किया जाएगा।
चार दशक से अधिक समय से सेवा
उल्लेखनीय है कि नारायण सेवा संस्थान वर्ष 1985 से दिव्यांगजनों एवं जरूरतमंदों के लिए सेवा कार्य कर रहा है। संस्थान के संस्थापक पद्मश्री कैलाश ‘मानव’ को सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल को वर्ष 2023 में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
संस्थान के अनुसार, अब तक देश-विदेश में 40,403 से अधिक दिव्यांगजनों को निःशुल्क कृत्रिम अंग प्रदान किए जा चुके हैं, जबकि 4.54 लाख से अधिक दिव्यांग जनों की निःशुल्क चिकित्सा की गई है। पुणे का यह शिविर इसी सेवा श्रृंखला को आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास है।


